आसमान का आँसू
बरसात के आँत में
पहुँच की बातचीत
मेंढक के भाषा में।
खाल खेत-खलिहान
दिख रहा है जल से
जात के परिभाषा में
बात बेबात वात
खात लात रात
परिवर्तन के आशा में।
झूक बादलों के ताँगे
क्यों खींच लाया?
भूख के तमाशा में।
अद्भुत आनंद का भोजन
कंकड़ से सबका बचपन
पानी में *पानी का लिट्टी*
पकाता खाता उल्लास में।
प्रथम बार में तीन लिट्टी
चेतना चार चिकनी मिट्टी
एक अनोखा चोखा चिट्ठी
जलतरंग निमंत्रण लाया
किनारों पर
मेंड़ या डारों पर
असंख्य शंख को निचोड
खाते-गाते आ-जा रहे हैं
जीवन के अनंत आकाश में
कपार पर कब देता हग
किसी को पता नहीं
क्या गलत क्या सही
तहाँ खायें और हगे
बच्चें लिए हाथ में गुलेला
कब किस पर चलायेंगे
नभ-जल-थल के राजा
बूढें बरसात के बच्चों से
भरोसा चाहते विश्वास में
खाने दो मुझे पानी का लिट्टी
खेत-खलिहान-ताल-पोखर में
रोक दो प्लाटिंग का रेस!
दुख रहा है अपना दिल
मिट रहा है याद खिल
बचपन का पचपन में
इधर-उधर गाँव-शहर
घूम रहा है एक लिए
उम्मीद की यात्रा पास में।
तब पानी के लिट्टी हेतु
कवि की कविता पानी
बन जाता भूख-प्यास में।
-गोलेन्द्र पटेल
रचना : १५-०१-२०२०



Very nice all your poem
ReplyDelete#golendrapatel
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