आदर आभार अभिनंदनीय आर्य!
आपका अद्भुत आत्मीय सत्कार्य!
साहित्य भास्कर भविष्य भार्य!
हमारे हृदय हविष्य काव्याचार्य!
साहित्यिक शब्दसुमन शिरोधार्य!
माननीय मदन कश्यप कृपाचार्य!
सत्यसार समुद्रीय-अंतरीक्ष नील!
राग अनुराग जलकुंड झील!
कर्षित कलियों के मुर्झाया दिल!
व सूखी क्यारी सींच रहे अखिल!
रेत और रेह में धूप सोखतें देह भर!
नई आकृतियाँ लाना चाहते गेह पर!
(अर्थात् साहित्य में।)
नदी का द्वीप कहता शांती नहीं!
रोशनी चाहिए , सहृदय में वहीं!
कहा-कही दूध-दही सब सही!
समय और समाज के सतह
पर "मिल के पत्थर" की तरह
शुक्ल जी और मदन जी ने रचा है!
वहीं काव्य , जिसका अर्थ पचा है!....
*-गोलेन्द्र पटेल*
*"मेरे प्रिय कवि" से*
क.सं. : 4
क.रो.नं. : 217
बी.ए. आनर्स "हिन्दी" द्वितीय वर्ष
【कला संकाय : हिन्दी विभाग】बीएचयू
मो.नं.+918429249326
*काव्यगुरु : श्रीप्रकाश शुक्ल*



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