सेवक अनेक थे
सूर्यतेज से सम्पन्न
महापुरुष नेक थे
जिसके शब्दकोश में
जय विजय का घोष था।
जिसके रोष में
क्रांतिकारियों का जोश था।
जिसके होश में
सत्य और संतोष था।
जिसके भक्ति में
स्वदेश मुक्ति का संदेश था।
जिसके शक्ति में
सैनबल-जनबल अशेष था।
वही अपना प्यारा
नेता सुभाषचंद्र बोस था।
-golendra patel

No comments:
Post a Comment