रचने के लिए अर्ज़!
पावन पूज्य सरिता
वरुणा अस्सी व गंगा ने दिए तर्ज़!
सीवर से जिए मर्ज़!
अनेक अंकुरित हो कथा के खेत में
कुछ ओ पार रेत में...
ज्योतिर्मय चिता में देख
कवि ले रहा है
किताब कॉपी कलम के लिए कर्ज़!
स्याही का हाशिये के यज्ञकागज़ पर
घाट के सिढ़ियों से दर्द का दर्शन पढ़
घाटवाक् कर रहे फक्कड़ प्रेमी जन
कबीर ,रैदास ,तुलसी ,भारतेंदु ,प्रसाद व प्रेमचंद
आदि के प्रासंगिकता के पोखरे में खिले कमल
नव विधाओं के नव जमीन पर दर्ज किए काशी।
-golendra patel



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