उल्लेखनीय है फेसबक,गूगल,यू ट्यूब,माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर आदि कंपनियों ने मार्च के मध्य में एक साझा बयान जारी किया था जिसमें कोविद-19 से संघर्ष करने वायदा किया गया।यह एक चलताऊ किस्म का साझा बयान था जो इन कंपनियों ने दिया था। इस बयान में मिस इन्फॉर्मेशन से लड़ने और प्रामाणिक सूचनाएं देने का वायदा किया गया था।लेकिन अभी तक ये कंपनियां अपने इस वायदे का पालन नहीं कर पायी हैं।बल्कि इस बीच में उलटा हुआ है।कोरोना से लड़ने के नाम पर अंट-शंट दवाओं के नाम विभिन्न तथाकथित शोधपत्रों में गूगल में प्रकाशित हो रहे हैं। एक ही उदाहरण काफी होगा।
इंटरनेट पर विशेषज्ञों के एकदल ने ‘‘कोरोना वायरस क्योर’’ के तहत गूगल पर सर्च किया तो पाया कि वहां अनेक तथाकथित शोधपत्र भ्रमण कर रहे हैं लोग बड़ी संख्या में पढ़ रहे हैं और उनकी गलत-सलत सूचनाओं का दुरूपयोग कर रहे हैं। ये पत्र ट्विटर पर भी सर्कुलेट किये जा रहे हैं। इसी तरह का एक शोधपत्र तकनीकी व्यवसायी एलॉन मास्क ने गूगल डॉकूमेंटस में साझा किया । कहा गया यह वैज्ञानिक रिसर्च पेपर है।इसे स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के कैलीफॉर्निया स्थित स्कूल ऑफ मेडीसिन में कार्यरत वैज्ञानिक सलाहकार ने तैयार किया है। इस पेपर के इंटरनेट पर प्रकाशित होते ही दूसरे ही दिन फॉक्स टीवी चैनल ने इस पेपर के आधार फीचर बनाया और कहा कि कोरोना से बचने की दवा है ‘‘हाइड्रोक्सीक्लोरो क्वीन’’। इस दवा से कोरोना 100फीसदी खत्म हो जाएगा।इसी तरह फ्रांस से एक लघु शोधपत्र सामने या जिसमें दावा किया गया कि ‘‘क्वीनाइन’’ और ‘‘ टॉनिक वाटर’’ और ‘‘मलेरिया ड्रग’’को इंटरनेट पर खोजने वालों की बाढ़ आ गयी।देखते ही देखते बाजार में ये दवाएं और प्रोडक्ट हाथों हाथ बिक गए। इसका अर्थ है इंटरनेट पर जो लिखा जा रहा है उसे जनता पढ़ रही है।सुन रही है।
फॉक्स टीवी चैनल से कार्यक्रम आने के बाद स्टैंनफोर्ड विश्वविद्यालय ने बयान देकर कहा कि फॉक्स ने जिस व्यक्ति को हमसे जोड़कर पेश किया है उसका हमसे कोई संबंध नहीं है और वह व्यक्ति उनके विश्वविद्यालय के किसी रिसर्च कार्यक्रम में शामिल नहीं रहा है।इस घटना के बाद ट्विटर पर भयानक तूफान आ गया,बड़ी संख्या में डाक्टरों और वैज्ञानिकों ने इस तरह के डिस इनफॉर्मेशन कैम्पेन की आलोचना की।लोगों ने यहां तक लिखा कि इस दवा की अचानक कमी हो गयी और इस दवा को डाक्टर की सलाह के बिना लेने से यह शरीर को नुकसान पहुँचा सकती है।इस तूफान के बाद ट्विटर ने निर्णय लिया और ‘‘हाइड्रोक्सीक्लोरो क्वीन’’ दवा से संबंधित सैंकड़ों ट्विट हटा दिए। ये सारे ट्विट दक्षिणपंथियों के थे। वे लोग मिस इनफॉर्मेशन फैलाकर जश्न मना रहे थे। जो जश्न मना रहे थे उनमें फॉक्स चैनल की हॉस्ट लोरा इनग्राहम,डोनाल्ड ट्रंप के एटॉर्नी रूड़ी गुईलियानी और कंजरवेटिव पंडित चार्ली के नाम खासतौर पर उल्लेखनीय हैं। इसके बाद ट्रंप ने इस दवा को लेकर जमकर उत्साह दिखाया.इससे बाजार में केमिस्टों से लेकर पीएम मोदी तक इसका दवाब देखा गया।इससे एक बात पता चलती है कि विज्ञान के बारे में मिस इनफॉर्मेशन फैलाया जाए तो उससे कितने व्यापक स्तर पर नुकसान हो सकता है।इस घटना ने वैज्ञानिकों पर भी दवाब बनाया कि वे कोरोना के लिए दवा न बनाएं।इस तरह के माहौल से राजनेताओं का कोई खास नुकसान नहीं हुआ लेकिन आम जनता और विज्ञान की क्षति जरूर हुई है।
किसी भी खुले और स्वतंत्र समाज पर थोपे गए देश,जनता के दिमाग का मेनीपुलेशऩ और अग्राह्य को ग्राह्य कराने की प्रवृत्ति बेहद खतरनाक है। कोरोना के महासंकट काल में यही सब हो रहा है।बड़े पैमाने पर कोरोना की सच्चाई छिपायी जा रही है।मरीजों की संख्या,नामकरण,मृत्यु,बड़े स्केल पर जनता की निगरानी,असहमति व्यक्त करने पर हमले या पाबंदी,जबरिया कोरेंटाइन या फिर वैक्सीन लगाने की कोशिश आदि चीजें सामने आ रही हैं।यह एक तरह से जनता के नॉर्मल जीवन को नियंत्रित करने की कोशिश है।इस दौर में
सिर्फ इलाज कराने में ही पशुपालकों को समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि अपने पशुओं को गर्भधारण कराने में भी दिक्कत आ रही है। लॉक डाउन की वजह से कृत्रिम गर्भधारण कराने वाले गांव में नहीं आ रहे हैं।
श्रीराम तिवारी
माननीय ,
मान्यवर,
कोरोना की भयानक मारक क्षमता का मुकाबला करने के लिये 3 मई तक तो क्या हम बुजुर्ग लोग 3 जून तक लॉकडाऊन में रह लेंगे!लेकिन सरकार कोई ऐंसी व्यवस्था तो करे कि फल सब्जियां और किराना सामान खरीद सकें! अभी तो ये हाल है कि मेडीकल स्टोर्स पर दवाईयां खत्म! उधर खेतों में सब्जियां सड़ रही हैं, क्योंकि शहर ले जानी संभव नहीं! इधर शहर में सड़ी गली सब्जी भी चोरी छुपे 100 रुपया किलो बिक रही है!सरकार को चाहिये कि बाजिब दामों पर खाद्यान्न और सब्जियां उपलब्ध कराए!लॉकडाऊन का समय बढ़ाना तभी सफल होगा,जब घरों में बंद लोगों को जिंदा रहने के लिये न्यूनतम संसाधन उपलब्ध हों! हर एक को दवाइयां, राशन पानी,सब्जी और भोजन मिले!यदि कदाचित कोई भूख से या अन्य बीमारी से घर में मर गया तो कोरोना से बचाव की कुर्बानी बेकार जाएगी!
जय हिंद

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