जिसके मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथाकार एवं तद्भव पत्रिका के संपादक अखिलेश ,अध्यक्षता हिंदी के प्रसिद्ध कवि ज्ञानेंद्रपति ,वरिष्ठ कवि सुभाष राय के उपस्थिति में सम्पन्न हुआ ।जिसमें रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार 2020 का छठां पुरस्कार कवि संदीप तिवारी को प्रशस्ति पत्र,अंगवस्त्र के साथ 5000 की राशि पुरस्कार के रूप में प्रदान की गई।
इसके साथ आज का जो शोर है उसके साथ एक डिस्टेंस स्वर की जरूरत है जिससे काव्य के स्वर को पहचाना जा सके।शोर बनाम स्वर की बाइनरी में हम स्वर की शिनाख्त करने की प्रक्रिया से जुड़ना और जोड़ना चाहते हैं।और इसी कारण से कवि की सामाजिकता यही पर सुरक्षित रहती है और बिना सामाजिकता के कवि का कर्म चरितार्थ हो नहीं सकता ।
आगे इन्होंने कहा कि यह धरती बड़ी विचित्र है इस धरती पर हम लोग या तो कह रहे होते हैं या देख रहे होते हैं।कुछ लोग केवल कहते चले जाते हैं कुछ लोग केवल देखते चले जातें हैं कोई भी धरती की चिंता नहीं करता जिस पर खड़ा होकर के वह या तो खाता जा रहा है या देखता जा रहा है इस धरती की चिंता कौन करेगा,इस धरती की चिंता करने का बुनियादी दायित्व वह कवि का है और वहीं पर उसका कवि कर्म है ।
कविता लिखने के लिए सहजात प्रतिभा की जरूरत है क्योंकि हर कवि की अपनी जमीन होती है जहाँ पर वह खड़ा होकर अपने दुनिया को अपने नजरिये से देखने की कोशिश करता है इस नाते से आज के आयोजन से यह जरूर है कि नई पीढ़ी अपने जमीन को पहचाने और आसमान से आँख मिलाने का साहस करे।
आज के कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रहे ज्ञानेंद्रपति ने कहा कि कवि संदीप तिवारी बहुत आत्मिक कवि हैं ,इनके कविताओं में जो संवेदनाएं हैं वह गहरे स्तर पर कवि के जमीन से जोड़ते हुए कवि के आत्मसातीकरण के आधार पर कवि को आदर्श रूप देती हुई दिखती हैं।कवि के भीतर यह जो वर्तमान के साथ अतीत भाव है वह आज के यथार्थ को नए ढाँचे में ढालता दिख रहा है ।आगे ज्ञानेंद्रपति जी ने कहा कि कविता में रचनाकार के पीछे का यथार्थ गूंज रहा होता है,जो उसे साथ लेकर चल रहा है आगे आपने कहा कि कवि कर्म के लिए कवि का सास्वत होना जरूरी है और यही सास्वतता कवि को समकालीन बना देती है और यही सास्वत की इकाई कवि को यथार्थ से जोड़ती दिख रही है। साथ ही कहते है कि कविया में जो यथार्थ है वह दिया हुआ यथार्थ नहीं है बल्कि यह कमाया हुआ यथार्थ है और इस तरह से कवि ऐंद्रिय बन जाता है।साथ ही जाग्रत यथार्थ में जो वेदना है वह कवि के भीतर प्रतिध्वनित होती है।
इस तरह हम इन्हें सन्दीप यात्राओं का कवि भी कह सकते है।
हिंदी कविता में घर से निकलने की पीड़ा को कवि दर्ज करता है लेकिन घर से निकलना भी कितना जरूरी है।हमारा समय और इस समय का जो ताल है उस ताल के साथ रोजी-रोटी के लिए तमाम तरह की क्रियाकलापों के लिए निकलना पड़ता है तो सवाल है कि परिस्थितियां किस किस से सामना किया जाए ।कविता के माध्यम से कवि विस्थापन को किस प्रकार ब्यक्त करता है यह भी देखने की जरूरत है। विस्थापन की कविता में भी संवेदना भी देखी जानी चाहिए।विस्थापन पर केवल दर्द ब्यक्त कर देना ठीक नहीं है।।
इसके साथ युवा कवियों में गोलेंद्र पटेल,आदित्य राज(मणिकर्णिका के ओर हिंदुस्तान),प्रतिभा श्री(भूख,श्रमिक),आर्य पुत्र(बापू),आर्य भारत(अफीम का बेटा,गिलकिस बानो),अनुपम सिंह(एक औरत का अंत,जहारबाज,राष्ट्रीय सूतक),रविशंकर (डर)तौफीक गोया),अरुणाभ सौरभ (राग यमन,धरतीमाता-भारतमाता,कथकहि) डॉ.अमरजीत राम (किसान और उसके बच्चे,तुहि लौट आओ),निलाम्बुज, अदनान(याद का शहर),डॉ.रचना शर्मा (जिसे मैंने तोड़ा,प्रेम में पतझड़,नेपथ्य संवाद),अंकिता खत्री( मैं पानी बन जाऊंगी,मैं गांव-गांव तुम शहर-शहर,आसान नहीं बनारस से प्यार करना)डॉ.सोनी पांडेय ने ( मेरे पास सुंदर कुछ नहीं था, मूर्तियां का सच,कुछ अधूरी बातें, ये जो दिखाई दे रहा है), प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल ने (शिव), प्रो.बलराज पांडेय ने (अबकी बार जाड़ा कुछ ज्यादा पड़ा है, घड़ी, लड़की, सबसे बड़ा कलाकार) , वरिष्ठ कवि ज्ञानेन्द्रपति ने( शीघ्रदर्शनम,ट्राम में एक याद), प्रो चंद्रकला त्रिपाठी , कवि सुभाष राय,कुमार मंगलम ने कविता का पाठ किया।
-रंजना गुप्ता-
संवेदना सिद्ध कवि हैं संदीप तिवारी :ज्ञानेन्द्रपति
भोजपुरी अध्ययन केंद्र, बीएचयू और रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्थान,वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह तथा कविता पाठ का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस कार्यक्रम का पहला सत्र सम्मान समारोह का रहा जिसके मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथाकार और तद्भव पत्रिका के संपादक अखिलेश थे जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध हिन्दी कवि ज्ञानेन्द्रपति ने की।वरिष्ठ कवि सुभाष राय कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे।कार्यक्रम में नैनीताल के युवा कवि संदीप तिवारी को छठा रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार 2020 प्रदान किया गया जिसमें प्रशस्ति पत्र,अंगवस्त्रम के साथ सम्मानित राशि के रूप में पांच हज़ार की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य अतिथि अखिलेश ने कहा कि दमन और अकेलेपन के विरोध में आज के युवा कवियों का स्वर यथार्थ को बहुत करीब से पहचानने की कोशिश का स्वर है। विस्थापन के विरुद्ध लिखते हुए भी संदीप अपनी कविता में कहीं नहीं कहते कि आप बाहर मत जाइए। यथार्थ आज हमें गहरे अकेलेपन में धकेलने की कोशिश करता है। संदीप उस गहरे अकेलेपन के विरोध में खड़े होते हैं। उनकी कविताएं अपनी जड़ों, अपने लोगों और अपने परिवेश से गहरे इश्क की कविताएं है। इनकी कविताओं में जो चीज़ अलग दिखती है वह यह कि इनकी कविताएं किसी एक मुहावरे में बंधी हुई कविताएँ नहीं है। इनकी कविताएं युवा आत्म विश्वास की कविताएं हैं।संदीप समकालीन कविता के दबाव से मुक्त कवि हैं जिनके यहां चीजों के नष्ट होते जाने की गहरी पीड़ा है।
अध्यक्षीय भाषण देते हुए प्रसिद्ध कवि ज्ञानेन्द्रपति ने कहा कि संदीप की कविताओं को पढ़ते सुनते हुए एक बात साफ उभर के आती है कि इस कवि की कविताओं का प्लाट बहुरंगी है। हमारे समय के यथार्थ, उसके कोलाहल और वेदना की ध्वनियां संदीप में साफ सुनाई पड़ती है। संदीप संवेदना सिद्ध कवि हैं जो नवीनता के प्रयोग से निरंतरता को बचाये रखने की कोशिश करते हैं।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि सुभाष राय ने कहा कि संदीप की कविताओं की दो मुख्य विशेषता है। एक तो विस्थापन की पीड़ा को रचते हैं और दूसरी राजनीतिक पक्षधरता की बात करते हैं। आज के दौर में जब डर और हताशा का माहौल समाज की चेतना को मार रही है संदीप की कविताएं बहुत कुछ आशा और उम्मीद को बचाये रखने में अपनी भूमिका निभाती है। संदीप अपनी कविताओं में दुनिया की खूबसूरती को रचते है। ट्रैन इनकी संवेदना की खिड़की है जहां से ये जीवन को देखते हैं।
युवा आलोचक डॉ विंध्याचल यादव ने कहा कि संदीप की कविताएं मोटे तौर पर तीन तरह की कंटेंट लेकर उपस्थित होती है। एक तो वह सीधे-सीधे राजनीतिक प्रतिरोध के कवि हैं। संदीप की कविताओं की दूसरी विशेषता किसान जीवन की दुख तकलीफों को सामने लाने की कोशिश है। तीसरी विशेषता जो दिखाई देती है वह विस्थापन से जुड़ी हुई कविताएँ हैं। संदीप के यहां विस्थापन का सिर्फ दुख ही नहीं है बल्कि जिन मजबूरियों में विस्थापन हुआ है उसका जायज़ा भी है।
आत्मवक्तव्य देते हुए सम्मानित कवि संदीप तिवारी ने कहा कि जिस ज़मीन ने मुझे आगे बढ़ाया है, उसका एक कवि के रूप में मैं कर्ज उतार रहा हूँ। उन्होंने अपनी कविताओं को गहरी सामाजिक बेचैनी के बीच रची जाने वाली कविताओं के रूप में याद किया।
स्वागत वक्तव्य देते हुए केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि उत्सव के इस बाजारू शोर में कविता ही हैं जो हमारे उल्लास की शांति को बचा सकती है। कविता इस शोर के बीच आम जनता के स्वर को पहचानना चाहती है। यही वह बिंदु है जिसमें कवि की सामाजिकता सुरक्षित रहती है। नई पीढ़ी से अपेक्षा की कि वह अपनी जमीन को पहचाने और आसमान से आंख मिलाने का साहस करे।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रो रामकीर्ति शुक्ल ने इस क्रम में प्रशस्ति पत्र का वाचन भी किया।
कार्यक्रम के इस सत्र का संचालन शोध छात्र जगन्नाथ दुबे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन वंशीधर उपाध्याय ने दिया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्य पाठ का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता सुभाष राय ने की।
इस सत्र में वरिष्ठ कवि ज्ञानेन्द्रपति, बलिराज पांडेय, चंद्रकला त्रिपाठी, श्रीप्रकाश शुक्ल, रचना शर्मा, अरुणाभ सौरभ, तौसीफ गोया, सोनी पांडेय, अनुपम सिंह, अमरजीत राम, अदनान कफील दरवेश, निलाम्बुज, रविशंकर, अंकिता खत्री, आर्यपुत्र दीपक, आर्य भारत, प्रतिभा श्री, आदित्य राज,युवा कवि गोलेन्द्र पटेल,संदीप तिवारी ने काव्य पाठ भी हुआ।
कविता पाठ के सत्र का संचालन दिल्ली से आये कुमार मंगलम ने किया। धन्यवाद ज्ञापन आदित्य विक्रम सिंह ने किया।
(प्रस्तुति:दिवाकर तिवारी)



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