चूचकी चाम
चमचमाती
घाम
राम!राम!राम!...
नाम
जपती
जननी
नन्हा शिशु थाम
सुबह-शाम
चूचुक चिंचोड़ता
चुपचाप
जैसे पका आम
आप!
या
शिवलिंग पर
चढ़ा दूध
नाली-गटर
पथ धर
हरि-हर
तक जाता है
विवेक-ज्ञान
विद्वान
इंसान
भिक्षादान : जिसे वे आँसू देते हैं
वही दयाभिक्षुणी कर्षित माता है
जन्म जीव सेवी हैं : महतारी
लाचारी-बेचारी-नारी
आज वक्त से है हारी
मदद करो बारी-बारी
मनःआदमी अवतारी
कविगण करुणाधारी
रचना : ०९-०१-२०२०



मस्तिष्क की बात है
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