Friday, 27 March 2020



मैं!

वह हूँ

जो किसी का गुलाम नहीं

चाहे तुम वीर हो

चाहे तुम धीर हो

चाहे तुम ज्ञानी हो

चाहे तुम ध्यानी हो

चाहे तुम ईश्वर हो

चाहे तुम अमर हो

चाहे तुम जो हो

तुम सब मेरे गुलाम हो

मैं किसी का नहीं

लोग मुझे कहते हैं

समय!!
जय

विधि-विधाता

नियम-नियंता

आता-जाता

जी हाँ मैं ही हूँ

सृष्टि में अकेला निर्भय

महाकाल पर विजय-

पाने वाला सत्य!!

-गोलेन्द्र पटेल



No comments:

Post a Comment

राहुल से हनुमान: एक ही चेतना के दो रूप — गोलेन्द्र पटेल

राहुल से हनुमान: एक ही चेतना के दो रूप भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में यह प्रवृत्ति देखी जाती है कि विभिन्न परंपराएँ समय-समय पर एक-दूसरे के महा...