GolendraGyan (गोलेन्द्र ज्ञान) | बहुजन साहित्य, सामाजिक न्याय और मानवता का हिंदी मंच
“गोलेन्द्र ज्ञान” हिंदी का एक वैचारिक, साहित्यिक और सामाजिक मंच है, जहाँ बहुजन साहित्य, सामाजिक न्याय, मानवता, समता, शिक्षा, संस्कृति, कविता, आलोचना और जनचिंतन से जुड़े मौलिक लेख प्रकाशित किए जाते हैं। यह ब्लॉग भारतीय समाज, लोकसंस्कृति, बहुजन चिंतन, साहित्यिक विमर्श तथा मानवीय मूल्यों को सरल, शोधपरक और संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत करता है। यहाँ कविता, कहानी, निबंध, समीक्षा, दर्शन, इतिहास और समकालीन विचारों पर नियमित सामग्री उपलब्ध है।
Saturday, 10 October 2026
लोकतंत्र बचाओ सप्ताह
Saturday, 3 October 2026
‘पटेल’ : सत्ता में उपस्थित, साहित्य में अनुपस्थित
जब ‘पटेल’ मूलतः एक प्रशासनिक पद था, तो यह जातिसूचक शब्द कब और कैसे बन गया? ‘पटेल’ शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत के ‘पट्टकिल’ (paṭṭakila) से मानी जाती है, जिसका संबंध राजकीय भूमि के पट्टेदार, भू-धारक तथा ग्राम-प्रशासन से जुड़े पदाधिकारी से था। भाषाई रूपांतरण के क्रम में यह प्राकृत के ‘पट्टइल’ (paṭṭaïlla) से होते हुए विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित हुआ और आगे चलकर गुजराती में ‘पटेल’ तथा मराठी में ‘पाटिल/पाटील’ के रूप में प्रचलित हुआ। ऐतिहासिक संदर्भों में ‘पटेल’ ग्राम-प्रधान अथवा ग्राम-स्तरीय राजस्व एवं प्रशासनिक दायित्व निभाने वाले व्यक्ति की पदवी रहा है। कालांतर में यही पदवी उपाधि, फिर पारिवारिक उपनाम और अनेक संदर्भों में सामुदायिक पहचान का सूचक बन गई। यहीं से प्रश्न उठता है; जो शब्द कभी ग्राम-प्रशासन में एक भूमिका का परिचायक था, वह आज जाति की पहचान का पर्याय कैसे बन गया? आधुनिक भारत में ‘पटेल’ उपनाम से सर्वाधिक चर्चित ऐतिहासिक व्यक्तित्वों में सरदार वल्लभभाई पटेल (1875–1950) का नाम प्रमुख है। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे तथा भारतीय रियासतों के एकीकरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। तो, प्रिय पुरखे सरदार पटेल जी, सवाल केवल यह नहीं कि ‘पटेल’ कौन है; सवाल यह भी है कि ‘पटेल’ को हमने क्या बना दिया है?
प्रिय पुरखे सरदार वल्लभभाई पटेल जी!
हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रमों में ‘पटेल’ उपनाम वाला कोई साहित्यकार शामिल नहीं है। TGT, PGT और Assistant Professor जैसी भर्ती परीक्षाओं की गाइडों में भी ‘पटेल’ उपनाम वाले किसी कवि-लेखक का उल्लेख नहीं है।
विडंबना देखिए—इस देश में ‘पटेल’ उपनाम के साथ संसद भवन तक पहुँचना, विश्वविद्यालयों के साहित्यिक पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाओं की गाइडों तक पहुँचने से कहीं अधिक आसान है।
‘पटेल’ सरनेम धारण करने वाले साहित्यकारों का पाठ्यक्रमों में शामिल न होने की यह केवल मेरी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है; अन्य ओबीसी समुदायों के सरनेम से जुड़े अनेक रचनाकारों के संदर्भ में भी ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। मैं यह बात किसी के प्रति शिकायत या विरोध के भाव से नहीं, बल्कि साहित्य की व्यापकता, प्रतिनिधित्व और न्यायपूर्ण स्मृति की चिंता के साथ कह रहा हूँ। साहित्य तभी सचमुच लोक का साहित्य बनता है, जब उसमें समाज के विविध समुदायों, अनुभवों और आवाज़ों के लिए जगह हो।
बहरहाल, पढ़े-लिखे और जागरूक लोगों का एक बड़ा वर्ग जातिसूचक सरनेम से दूरी बना रहा है। संभव है, मेरे बाद ‘पटेल’ सरनेम धारण करने वाली पीढ़ी ही विरल हो जाए। तब शायद साहित्य के पन्नों पर ‘पटेल’ केवल एक जातिसूचक पहचान नहीं, बल्कि एक साहित्यिक स्मृति बनकर रह जाए।
★★★
Wednesday, 30 September 2026
गोलेन्द्र : मातृ-पितृनामाधारित संबोधन
गोलेन्द्र : मातृ-पितृनामाधारित संबोधन
माता का नाम — उत्तम
पिता का नाम — नन्दलाल
कवि गोलेन्द्र के मातृ-पितृनाम के आधार पर उनके लिए निम्न संस्कृतनिष्ठ एवं काव्यात्मक संबोधनों का प्रयोग किया जा सकता है—
मातृनामाधारित संबोधन
उत्तमानन्दन — उत्तम के प्रिय पुत्र; उत्तम के आनंदस्वरूप पुत्र।
उत्तमासुत — उत्तम के पुत्र।
उत्तमासूनु — उत्तम के पुत्र।
उत्तमतनय — उत्तम के पुत्र।
उत्तमात्मज — उत्तम से उत्पन्न पुत्र।
उत्तमापुत्र — उत्तम का पुत्र।
उत्तमासम्भव — उत्तम से उत्पन्न।
उत्तमेय — उत्तम से संबद्ध पुत्र के अर्थ में प्रयुक्त काव्यात्मक नव-रूप।
उत्तमीनन्दन — यदि मातृनाम का रूप उत्तमी माना जाए, तो ‘उत्तमी का पुत्र’ के अर्थ में काव्यात्मक संबोधन।
औत्तमेय — ‘उत्तमी का पुत्र’ के अर्थ में निर्मित काव्यात्मक नव-प्रयोग; यह पारंपरिक संस्कृत का प्रचलित संबोधन नहीं है।
पितृनामाधारित संबोधन
नन्दलालनन्दन — नन्दलाल के प्रिय पुत्र; नन्दलाल के नन्दन।
नन्दलालसुत — नन्दलाल के पुत्र।
नन्दलालसूनु — नन्दलाल के पुत्र।
नन्दलालतनय — नन्दलाल के पुत्र।
नन्दलालात्मज — नन्दलाल से उत्पन्न पुत्र।
नन्दलालपुत्र — नन्दलाल का पुत्र।
गोलेन्द्र के प्रमुख काव्यात्मक संबोधन
उत्तमानन्दन गोलेन्द्र — माता उत्तम के पुत्र गोलेन्द्र।
नन्दलालनन्दन गोलेन्द्र — पिता नन्दलाल के पुत्र गोलेन्द्र।
उत्तमासुत गोलेन्द्र — उत्तम के पुत्र गोलेन्द्र।
नन्दलालसुत गोलेन्द्र — नन्दलाल के पुत्र गोलेन्द्र।
Monday, 28 September 2026
शिक्षा से होगा उद्धार || बहुजन मुख्यधारा की कविता || अर्जक कविता
Thursday, 24 September 2026
अशोक वाजपेयी : कविता, सत्ता और सांस्कृतिक वर्चस्व के कठघरे में || गोलेन्द्र पटेल
(पोस्टर साभार: नवीन कुमार)
Sunday, 13 September 2026
लोकतंत्र में हिंदी का लोक और लोक की हिंदी (भाषा, जनचेतना और सामाजिक न्याय की पड़ताल) — गोलेन्द्र पटेल
Saturday, 5 September 2026
राकेश कबीर: नदी के पक्ष में खड़े कवि — गोलेन्द्र पटेल
लोकतंत्र बचाओ सप्ताह
लोकतंत्र बचाओ सप्ताह सत्य जब संघर्ष के बीज बोता है तो बदलाव का अंकुर फूटता है और जब विपक्ष कमज़ोर पड़ जाता है तब संसद की सड़कों पर विद्यार्थ...
-
पहाड़ी कवि गोलेन्द्र पटेल की तीन कविताएँ:- 1). अरावली : पत्थरों की स्मृति, मनुष्यों की भूल नदी कहती है, मैं एक पहाड़ी कवयित्री हूँ इसीलिए...
-
"स्त्री / भूख / श्रमिक / पलायन / आत्महत्या / एक पन्ना / उत्तर आधुनिक कविताएँ / फर्क" : प्रतिभा श्री 【बीएचयू】 -© गोलेन्द्र पट...
-
बुद्ध -फूले-शाहू व अम्बेडकर विचारधारा पर आधारित प्रश्नोत्तरी (मूलनिवासी बहुजन राष्ट्रीय प्रतियोगिता)बुद्ध -फूले-शाहू व अम्बेडकर विचारधारा पर आधारित प्रश्नोत्तरी कक्षा 1 – 12 तक के विद्यार्थी प्रतिभागी होंगे । रज...















