Thursday, 29 January 2026

प्रेस विज्ञप्ति : NFS (Not Found Suitable)

 // प्रेस विज्ञप्ति //

विश्वविद्यालयों में “NFS” (Not Found Suitable) अब चयन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि बहिष्करण की रणनीति बन चुकी है। आरक्षित पदों पर योग्य अभ्यर्थियों के रहते बार-बार NFS किया जाना किसी अकादमिक असफलता का नहीं, बल्कि संरचनात्मक जातिवाद का प्रमाण है। विडंबना यह है कि जहाँ अनारक्षित पदों पर ‘सूटेबल’ आसानी से मिल जाते हैं, वहीं वही पात्रता OBC-SC-ST के लिए अचानक अयोग्य घोषित कर दी जाती है।

चयन समितियों में प्रतिनिधित्व का अभाव इस अन्याय को और गहरा करता है। जब आरक्षित वर्गों के साक्षात्कार अनारक्षित वर्ग के प्रभुत्व वाली समितियाँ लेती हैं, तो निष्पक्षता एक भ्रम बन जाती है। यही कारण है कि विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर स्तर पर OBC, SC और ST की हिस्सेदारी आबादी के अनुपात से बहुत नीचे है और अधिकांश पद आज भी खाली पड़े हैं।

NFS को बिना ठोस कारण के लागू करना अकादमिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जवाबदेही-विहीन सत्ता का दुरुपयोग है। यदि अभ्यर्थी न्यूनतम पात्रता पूरी करता है, तो उसे ‘अयोग्य’ ठहराने का स्पष्ट, लिखित और जाँच-योग्य आधार होना चाहिए। अन्यथा यह संवैधानिक समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

नेतृत्व और प्रतिनिधित्व रोकने के लिए नियमों का नया जाल—जैसे विभागाध्यक्ष बनने के लिए केवल प्रोफेसर की शर्त—उसी मानसिकता का विस्तार है जो बहुजन समाज को निर्णय-स्थलों से दूर रखना चाहती है। यह लड़ाई नौकरी भर की नहीं, सम्मान, बराबरी और प्रतिनिधित्व की है।

अब समय है कि विश्वविद्यालय व्यवस्था इस साज़िश से बाहर आए। NFS नहीं, न्याय चाहिए—भीख नहीं, संवैधानिक हक चाहिए। समानता कोई अनुकंपा नहीं, हमारा मौलिक अधिकार है।

उपर्युक्त गंभीर समस्याओं से निजात पाने का एक तरीक़ा यह है कि ओपन सीटों के साक्षात्कार हेतु गठित चयन समितियों में OBC, SC और ST वर्गों के प्रोफेसरों की न्यूनतम 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। अर्थात् चयन प्रक्रिया में सभी सामाजिक वर्गों का समुचित और संतुलित प्रतिनिधित्व अनिवार्य हो।

OBC विद्यार्थियों के साक्षात्कार में केवल OBC प्रोफेसर ही सम्मिलित हों; उसमें एक भी General श्रेणी का प्रोफेसर न हो। इसी प्रकार SC–ST विद्यार्थियों के साक्षात्कार में केवल SC–ST प्रोफेसर ही बैठें और General विद्यार्थियों के साक्षात्कार में General श्रेणी के प्रोफेसर ही हों। जब तक अनारक्षित वर्ग के प्रोफेसर आरक्षित वर्ग के पदों के लिए साक्षात्कार लेते रहेंगे, तब तक NFS की समस्या बनी रहेगी।

—गोलेन्द्र पटेल (युवा कवि-लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक/ UGC NET पास पूर्व शिक्षार्थी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी)

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