Friday, 10 April 2026

अप्रैल में सामाजिक क्रांति के प्रवर्तक (सम्राट अशोक, ज्योतिबा फुले, भीमराव आंबेडकर और राहुल सांकृत्यायन) — गोलेन्द्र पटेल

 

अप्रैल में सामाजिक क्रांति के प्रवर्तक

—गोलेन्द्र पटेल (चंदौली, उत्तर प्रदेश)

भारतीय इतिहास में सम्राट अशोक, ज्योतिबा फुले, भीमराव आंबेडकर और राहुल सांकृत्यायन जैसे व्यक्तित्व एक ऐसी वैचारिक परंपरा का निर्माण करते हैं, जिसका मूल उद्देश्य समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित समाज की स्थापना है।

अशोक ने शासन को नैतिकता और जनकल्याण से जोड़ा, फुले ने शिक्षा के माध्यम से वंचित समाज को जागरूक किया, आंबेडकर ने जाति-व्यवस्था को सामाजिक अन्याय की जड़ मानते हुए उसे समाप्त करने और संवैधानिक समानता स्थापित करने का मार्ग दिखाया, जबकि राहुल सांकृत्यायन ने तर्क, विज्ञान और आर्थिक परिवर्तन को सामाजिक मुक्ति का आधार माना।

इन सभी के विचारों में एक साझा तत्व है मनुष्य को केंद्र में रखकर समाज की पुनर्रचना। वे हर प्रकार की ऊँच-नीच और वर्चस्व का विरोध करते हैं तथा ज्ञान और जागरूकता को मुक्ति का साधन मानते हैं। आज भी उनकी विरासत यह सिखाती है कि न्यायपूर्ण समाज केवल विचारों से नहीं, बल्कि सतत संघर्ष और संगठित प्रयास से ही संभव है।

समता, स्वतंत्रता, तर्क, न्याय : चार युगदीपों की विरासत

भार-भरे इतिहास में, उठे पुरुष कुछ दीप
काल नहीं बस उनके थे, युग को देते रूप
मार्च-अप्रैल मध्य में, स्मृति सजे चार नाम
अशोक, फुले, आंबेडकर, राहुल ज्योति धाम।

युग-युग फैले जीवनों, फिर भी एक प्रवाह
मानव-मुक्ति, न्याय का, तर्कशीलता चाह
मनुष्य केंद्रित दृष्टि से, देखा जग का रूप
परंपराओं को कसा, न्याय-तर्क की धूप।

सिंहासन पर बैठकर, त्यागा हिंसा-पंथ
धम्म बना आधार जब, करुणा बनी अनंत
राज्य हुआ जनहितमुखी, बदला शासन-भाव
नियंत्रण से बढ़कर हुआ, जीवन-उन्नति भाव।

फुले जगे नव चेतना, तोड़ी जड़ दीवार
शिक्षा से खोले उन्होंने, समता के द्वार
जाति-पितृ की जाल को, समझा बंधन-रूप
ज्ञान बना मुक्ति-पथ, उजियारा हर कूप।

आंबेडकर ने गढ़ दिया, विचारों का विस्तार
जाति जड़ें जब तक रहें, अधूरी हर धार
स्वतंत्रता-समानता, बंधुता का मान
संविधान में ढालकर, किया उन्हें प्रदान।

राहुल ने पथ खोजते, ज्ञान किया आधार
आस्था से विज्ञान तक, बढ़ा विचार-विस्तार
इतिहासों को देख कर, तर्क दिया आकार
श्रम-बुद्धि से ही बने, बेहतर संसार।

फुले बोले शिक्षा से, बदले समाज-विचार
आंबेडकर ने साधा, विधि-राजनीति द्वार
राहुल ने आर्थिक ढाँचे, बदले का दी ज्ञान
अशोक ने नैतिक बना, शासन का अभियान।

चारों में यह एकता, जन्म न दे पहचान
समता, न्याय, बंधुता, मानव का सम्मान
धर्म भी तब सार्थक, जब हो लोक-हिताय
अंधविश्वासों से परे, नैतिकता अपनाय।

एक स्वप्न केंद्रित रहा, मानव हो स्वाधीन
समान, सम्मानित रहे, बंधुत्व रहे प्रवीण
आज विभाजित जगत में, यह संदेश महान
प्रगति वही सच्ची जहाँ, न्यायमूल्य प्रधान।

जयंती केवल स्मरण नहीं, चिंतन का भी काल
कैसा हो समाज हम, करें स्वयं से सवाल
तर्क, करुणा, न्याय पथ, यदि साहस से साध
संभव हर परिवर्तन है, यही विरासत हाथ।



रचनाकार: गोलेन्द्र पटेल (पूर्व शिक्षार्थी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।/मूलनिवासी बहुजन किसान कवि, जनपक्षधर्मी लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)
डाक पता - ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, तहसील-मुगलसराय, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।
पिन कोड : 221009
व्हाट्सएप नं. : 8429249326
ईमेल : corojivi@gmail.com


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