Friday, 27 March 2020



क्रोना वायरस से रहे सावधान चीन की यात्रा से बचे।

चीन में फैले कोरोना वायरस (जिसे वुहान वायरस भी कहा जा रहा है) को लेकर अब भारत में भी सतर्कता बरती जाने लगी है.

देश की राजधानी दिल्ली समेत मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरू, हैदराबाद, कोच्चि और कोलकाता हवाईअड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है. चीन और हांगकांग से लौटे यात्रियों की थर्मल जांच की जाएगी. यात्रियों को विमान में चढ़ने से पहले सेल्फ़ रिपोर्टिंग फ़ॉर्म भरना होगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस संदर्भ में आपात बैठक बुलाई है. इस बैठक में डब्ल्यूएचओ यह तय करेगा कि कोरोना वायरस से फैल रही बीमारी को क्या अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपात काल घोषित करने की ज़रूरत है या नहीं.

अमरीका में भी वायरस के संक्रमण का एक मामला सामने आया है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह शख़्स चीन के वुहान से अमरीका आया है.

यह नया कोरोना वायरस दिसंबर महीने में सबसे पहले पकड़ में आया था. लेकिन अब यह चीन की सीमा को पार करके दूसरे देशों में भी पहुंच चुका है.

ताज़ा मामलों की बात करें तो अमरीका के एक मामले से पहले थाईलैंड में दो और जापान में भी एक मामला सामने आ चुका है.सऊदी के एक अस्पताल में काम करने वाली केरल की नर्स इस जानलेवा वायरस से संक्रमित मिली हैं.

कोरोना वायरस के लक्षण
सिरदर्द
नाक बहना
खांसी
गले में ख़राश
बुखार
अस्वस्थता का अहसास होना
छींक आना, अस्थमा का बिगड़ना
थकान महसूस करना
निमोनिया, फेफड़ों में सूजन

कोरोना वायरस के कारण अमूमन संक्रमित लोगों में सर्दी-जुक़ाम के लक्षण नज़र आते हैं लेकिन असर गंभीर हो तो मौत भी हो सकती है.

जानलेना वारयस कोरोना हरियाणा में भी,  एहतियात रखें, सुरक्षित रहें

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चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस अब भारत में पैर पसारने लगा है । हरियाणा में भी खतरनाक करोना वायरस के कुछ संदिग्ध मरीज मिले हैं । फिलहाल इन्हें गहन चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया है. स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने इसकी जानकारी दी है । चंडीगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि इस महीने हरियाणा में चीन से 5 लोग आए हैं. इनमें से दो संदिग्ध मिले हैं. इनका इलाज सरकार की तरफ से किया जा रहा है और इनके पूरे परिवार पर भी नजर रखी जा रही है.हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में कोरोना वायरस को लेकर एडवाइजरी जारी कर दी है। कोरोना वायरस को लेकर केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर तैयारियां का जायजा भी लिया है. हाल ही में चंडीगढ़ PGI में कोरोना वायरस के एक संदिग्ध को भर्ती करवाया गया है. जो एक सप्ताह पहले चीन से लौटा है।

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क्या है कोरोना वायरस?

कोरोना वायरस (सीओवी) का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है. इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है. इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था. डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं. अब तक इस वायरस को फैलने से रोकना वाला कोई टीका नहीं है.

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?
इसके संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं. यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है. यह वायरस दिसंबर में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था. इसके दूसरे देशों में पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है.

क्या हैं इससे बचाव के उपाय?
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए. अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है. खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें. अंडे और मांस के सेवन से बचें. जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें.


*"कोरोना" ने गाँव के दुकानदारों की कमाई बढ़ा दी...*
*अब "हंता" जो चूहों से फैल रहा है जनता को जन्नत दिखा रहा है। हे ईश्वर अल्लाह खुदा...! ये कब खत्म होगा?😢 😭*
आज एक रुपये की एक मर्चा
कैसे चलेगा मजदूरों की खर्चा

जो खुले गाँव में दूकान हैं अब
मूर्गा मुर्गी सुर्गी के भाव में सब
लेहसुन प्याज़ टमाटर..को रब
बेज रहे हैं, कोरोना आया जब

शहर से गाँव में "कर्ता" के साथ
घर वाले प्यार से मिलाया हाथ
सभी सदस्य हो गए रोगी नाथ

रात में खबर आई
भाई नया वाइरस "हंता"
जनता का हर रहा है प्राण

"कोरोना" का जनक चमगादड़
और मगरमच्छ हैं या कहूँ वुहान
जो भारत के घरों में नहीं रहता
पर "हंता" फैल रहा है चूहों से
जनता हो जाना सावधान....

छींक खाँसी सरदर्द जुकाम बुख़ार
साँस फूलना बदनदर्द और दो चार
यही सामान्य लक्षण कोरोना का

हंता के भी उपर्युक्त ही लक्षण
फेफड़ा-गुर्दा में वाइरसगण
धीरे धीरे छेद कर देते हैं
ब्लड प्रेशर बढ़ता झटका लगता
धडाम से गिरता एक मानव रोगी....
*-गोलेन्द्र पटेल*
*बीएचयू परिवार*

*#हांटावायरस : नाहक अकुलाहट और भय से बचिए।*

*चीन से कुछ ख़बरें एक दूसरे विषाणु हांटावायरस-संक्रमण की आ रही हैं। एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है और तीस से अधिक संक्रमण से ग्रस्त पाये गये हैं। सोशल मीडिया पर इस ख़बर से --- ज़ाहिर है , परेशान लोगों के अकुलाहट और बेचैनी बढ़नी ही थी।*

*हांटावायरस कोई एक विषाणु नहीं है , अनेक विषाणुओं का एक समूह है। चूहों को ये विषाणु संक्रमित करते हैं , पर उनमें रोग उत्पन्न नहीं करते। ऐसा विज्ञान का मानना है कि ये विषाणु चूहों की प्रजातियों के साथ ही लाखों सालों से विकसित होते रहे हैं : यह एक क़िस्म का कोइवॉल्यूशन है। एक ऐसा साहचर्य जिसमें दोनों एक-साथ बिना किसी को हानि पहुँचाए रहा करते हैं।*

*किन्तु इन संक्रमित चूहों के मल-मूत्र या लार से सम्पर्क में आने से मनुष्य में ये हांटावायरस पहुँच सकते हैं। शरीर के उनके भीतरी अंगों में इनके कारण दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं। फेफड़ों व गुर्दों को ये विषाणु अधिक प्रभावित करते हैं : हांटावायरस हेमरेजिक फ़ीवर विथ रीनल सिंड्रोम एवं हांटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम इन विषाणुओं के दो प्रमुख रोग-प्रारूप हैं। ये बीमारियाँ विरली हैं , किन्तु इनके कारण मरीज़ों की मृत्यु भी होती गयी है।*

*हांटावायरस-रोगों का संक्रमण एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में होना बहुत विरल है। ऐसा न के बराबर देखा गया है। ऐसे में इन विषाणुओं का संक्रमण तभी सम्भव है , जब कोई मनुष्य किसी संक्रमित चूहे के मल , मूत्र या लार को सूँघ कर फेफड़ों में प्रविष्ट करा ले। चूहों के काटने , संक्रमित चूहों के मल-मूत्र-लार से युक्त किसी वस्तु को छूने अथवा ऐसा संक्रमित भोजन खाने से भी इन विषाणु-रोगों का होना पाया गया है।*

*बुख़ार , बदनदर्द , खाँसी , साँस फूलना जैसे लक्षणों वाले इन रोगों के कारण मरीज़ों में ब्लड प्रेशर का गिरना , शॉक और गुर्दों का फ़ेल होना पाया जा सकता है। हांटावायरस हेमरेजिक बुख़ारों की मृत्यु दर तीस प्रतिशत से भी ऊपर पायी जा सकती है।*

*हांटावायरस-सम्बन्धित संक्रमणों की मनुष्य-से-मनुष्य में पहुँचने की आशंका न के बराबर है। इसलिए वर्तमान कठिन समय में चीन में पुष्ट हुए कुछ मामलों के आधार पर यहाँ जनता को घबराये बिना कोरोना-विषाणु-सम्बन्धित पैंडेमिक के लिए अपने रोकथाम के उपायों पर पूरा अमल करते रहना चाहिए......*
*बीएचयू ने बनाई निम्न फिल्म-*https://www.facebook.com/2494193190655065/posts/3624299540977752/?sfnsn=wiwspmo&extid=wjStZKDc3hJn5QNL&d=n&vh=e

*अफवाहों से बचें : बीएचयू परिवार Whatsapp 8429249326*
*गॉड इज नॉट ग्रेट!*
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   21वीं सदी में दुनिया में जो पांच दस सबसे महान नास्तिक विचारक पैदा हुए हैं, उनमें से *रिचर्ड डॉकिंस* के बाद सबसे बड़ा नाम आता है, *किस्तोंपर हीचेन* का । उन्होंने 2007 में  *"गॉड इज नॉट ग्रेट"* नाम की किताब लिखी और उस किताब में उन्होंने  सैकड़ों सबूत दे कर यह साबित करने की प्रयास किया, कि पिछले 5000 साल में मानव जाति पर जितने भी महा भयंकर संकट आए हैं उस दौरान  दुनिया के किसी भी ईश्वर, अल्लाह या गॉड ने मानव जाति की कोई मदद नहीं की। *मानव जाति में जो मुश्किल से 5% बुद्धिमान लोग हैं जिन्होंने मानव जाति को हर संकट के समय कोई न कोई रास्ता ढूंढ कर दिया है ।*

    लेकिन धर्म के नाम पर जो लोग अपना पेट पालते हैं और अपने आप को धर्म का ठेकेदार और ईश्वर का  प्रतिनिधि समझते हैं उन लोगों ने *मानव जाति के जो 95% लोग है, और जो जन्मजात बुद्धिहीन है, और जो किसी न किसी काल्पनिक सहारे के बगैर जी ही नहीं सकते,* ऐसे लोगों को बार-बार धर्म ने अपने जाल में जकड़ कर रखा है। दुर्भाग्य से आज किस्तोंपर हिचेन हमारे बीच नहीं है, लेकिन कोरोना वायरस ने फिर एक बार किस्तोंपर हीचैन को सही साबित किया है। और यह भी साबित किया है कि कोरोना वायरस प्रकृति ने पैदा किया है, इंसान ने पैदा किए हुए ईश्वर गॉड और अल्लाह उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता । सिर्फ विज्ञान है जो उसे आज कंट्रोल करेगा।

   सभी धर्मों के ठेकेदारों का यह सनातन दावा है कि, ईश्वर इस ब्रह्मांड का निर्माता है और वह सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ और हर जगह पर मौजूद है और उसकी मर्जी के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता है ।

    दुनिया का सबसे बड़ा धर्म क्रिश्चन है और पूरी दुनिया के क्रिश्चन लोगों का सबसे बड़ा गुरु इटली के रोम शहर में रहता है, जिसे वेटिकन सिटी कहा जाता है। आजकल कोरोना के डर से इटली के सभी चर्च और वेटिकन सिटी लॉक डाउन है और उनका सबसे बड़ा धर्म गुरु यानी पोप कहीं छुप कर बैठा है। दुनिया का सेकंड नंबर का धर्म इस्लाम है और दुनिया भर में फैले मुसलमानों की सबसे पवित्र भूमि और पवित्र धर्मस्थल मक्का मदीना है,  वह भी आज पूरी तरह से बंद है। और दुनिया के तीसरे नंबर का धर्म यानी हिंदू धर्म और उसके सभी प्रसिद्ध धर्मस्थल जैसे कि चारों धाम, बालाजी मंदिर, शिर्डी के साईं बाबा का मंदिर, जम्मू के वैष्णो देवी का मंदिर और बहुत सारे छोटे-मोटे मंदिर आज लॉक डाउन है। दुनिया के किसी भी धर्म मे और किसी भी भगवान में इतनी ताकत नहीं है की वह कोरोना नाम के एक मामूली कीटाणु को रोक  सकें ।

   कोरोना वायरस ने फिर एक बार साबित किया है की ईश्वर, गॉड या अल्लाह यह सब पाखंड है । धर्म के ठेकेदारों ने बुद्धिहीन लोगों के अज्ञान और डर का फायदा उठाकर उनका शोषण करने के लिए दुनिया भर में बड़े-बड़े धर्मस्थल बना रखे हैं। और हजारों सालों से भोली भाली जनता के अज्ञान और डर का नाजायज फायदा उठा रहे हैं और उनका शोषण कर रहे हैं।

   जब हजारों लोग मुंबई से शिरडी तक बिना चप्पल पहने हुए पैदल जाते हैं और साईं बाबा को अच्छी बीवी, अच्छी नौकरी, अच्छी संतान और धंधे मे मुनाफा मांगते हैं और समझते हैं कि साईं बाबा उनको यह सब कुछ दे देगा। यदि साईं बाबा या बालाजी या वैष्णो देवी या अजमेर शरीफ या फिर मक्का मदीना और वेटिकन सिटी अपने भक्तों की ऐसी छोटी मोटी मांगे और मुरादे पूरी करते है और मानव जाति का हमेशा हित और सुख देखते हैं, तो फिर आज सारे के सारे छुपकर क्यों बैठे हैं ? कोरोना में ज्यादा ताकत है या फिर ईश्वर, अल्लाह या गॉड में ज्यादा ताकत है ?

   विज्ञान कहता है 14 बिलियन साल पहले बिग बैंग के माध्यम से इस विश्व की निर्मिती हुई। और लगभग 5 बिलियन ईयर पहले पृथ्वी की निर्मिति हुई । इस पृथ्वी पर आज तक विज्ञान ने लगभग 8 मिलियन प्रजातियां आईडेंटिफाई की है, और मानव जाति होमोसेपियन 18 मिलियन प्रजातियों में से एक प्रजाति है। और इस विश्व के अनगिनत साल के इतिहास में मानव जाति का कोई अता पता नहीं था, मानव जाति मुश्किल से पिछले चार मिलियन साल से इस पृथ्वी पर आई है। आज तक कई प्रजातियां पृथ्वी में आई कुछ साल तक रही और जलवायु बदलते ही नष्ट हो गई। मानव जाति भी इस पृथ्वी पर हमेशा रहेगी इसका कोई भरोसा नहीं है। जिस तरह डायनासोर और न जाने कितनी प्रजाति है आई और गई और इंसान भी इनमें से एक मामूली प्रजाति है।

   इस विश्व को चलाने वाली एक शक्ति है इसे विज्ञान नेचर या प्रकृति के नाम से जानता है। और विज्ञान यह भी मानता है कि प्रकृति एक निश्चित नियमों के अनुसार इसको चलाती है। यदि इस प्रकृति पर काबू पाना है तो हमारे हाथ में सिर्फ एक ही रास्ता है और वह है इस प्रकृति के रहस्य में नियमों को अनुसंधान संशोधन और प्रयोग के द्वारा जान लेना। आज तक विज्ञान ने प्रकृति के बहुत सारे नियमों को खोज लिया है और विज्ञान की खोज निरंतर जारी है। दुनिया के सारे धर्म हमको सिर्फ प्रकृति की पूजा करने की शिक्षा देते हैं और यह कहते हैं की पूजा करने से प्रकृति प्रसन्न होगी और हमारी मांगे और मुरादे पूरी करेगी। दुनिया के सारे धर्मों की यह मूलभूत शिक्षा ही सरासर झूठ है। विज्ञान ने इस बात को साबित किया है, पूजा पाठ करने से प्रकृति अपने नियम कभी नहीं बदलती यदि प्रकृति पर काबू पाना है तो उसका एकमात्र रास्ता है प्रकृति के नियमों को जानना। आज तक दुनिया में मानव जाति के सामने जितनी भी समस्याएं आई जैसे कि प्राकृतिक आपदाएं, और सभी प्रकार की संसर्गजन्य बीमारियां । किसी भी धर्म ने या धर्म गुरु ने या ईश्वर ने इनमें से एक भी बीमारियों का कोई इलाज मानव जाति को नहीं दिया । यह तो सिर्फ विज्ञान जिसने, मलेरिया इनफ्लुएंजा कॉलरा स्मॉल पॉक्स और कितनी बीमारी पर साइंस ने दवाइयां खोजी है और इन महामारीयों को हमेशा के लिए दुनिया से मिटा दिया है । कोरोना के ऊपर भी बहुत जल्द साइंस इलाज ढूंढ के निकालेगा ।

   आज तक मानव जाति के ऊपर जब भी कोई बड़ा संकट आता है तो सारे मानव अपने अपने तीर्थ स्थल पर जाकर भगवान अल्लाह या गॉड के सामने झुक जाते हैं, लेकिन कोरोना वायरस ने तो यह रास्ता भी बंद कर दिया है। अभी सिर्फ हमारे सामने एक ही रास्ता है और वह है विज्ञान का। सारे भगवान छुप कर बैठे हैं हमारे सामने सिर्फ एक ही रास्ता है और वह है हॉस्पिटल का। यह रास्ता हमें भगवान ने नहीं विज्ञान ने दिया है। किसलिए कोरोना वायरस से कुछ सीख लो! विज्ञान वादी बनो और जाति धर्म के सांचे से बाहर निकल कर एक नजर से हर इंसान और प्रकृति से प्रेम करना सीखो ।

*C/p from FB Wall of Advocate Gopal Bhagat*


डॉक्टरों द्वारा कोरोना वायरस से मारे गए लोगो का पोस्ट-मोर्टेम करने के बाद इस वायरस से सम्बंधित बहुत अहम् जानकारी दी गयी गई | 

ये वायरस स्वास नली में जाकर म्यूकस की लेयर बना लेता है जो सॉलिड हो जाती है और स्वास नली बंद हो जाती है . इलाज़ के लिए डॉक्टर्स इसी नली को खोलने की कोशिश करते हैं और दवाई देते हैं, हलाकि इसमें कई दिन लगते हैं और पेशेंट क्रिटिकल हो जाता है. इससे बचने के कुछ उपाय है जो की नीचे है -

१. दिन भर समय समय पर गरम पेय का सेवन करें जैसे की कॉफी, चाय, सूप, गरम पानी| हर २० mins में गरम पानी पिए| ऐसा करने से मुँह सूखेगा नहीं और अगर कोई वायरस आ गया होगा तो वो पेट में चला जायगा और गैस्ट्रिक juices की वजह से ख़तम हो जायगा इसके पहले की वो lungs तक पहुंच के पकड़ बना पाए.

२. हर दिन antiseptic जैसे की विनेगर या लेमन या साल्ट और गरम पानी से गरारे करें .

३. वायरस बालो और कपड़ो में चिपक जाता है| किसी भी साबुन या डिटर्जेंट से वो मर जाता है| इसलिए बाहर से घर आते ही सबसे पहले बिना कहीं बैठे सीधे बाथरूम जाके नहा लें | अगर कपडे धो नहीं सकते तुरंत तो धुप में रख देख कपड़ो को |

४. मैटेलिक जगहों पर वायरस 9 दिन तक रह सकता है . इसलिए ऐसी कोई चीज़ हो तो उसे जरूर साफ़ करें|  सीढ़ीओं की रेलिंग, डोर हैंडल्स आदि को छूने से बचे और घर साफ़ करते रहे

५.  सिगरेट न पियें

६. हर 20 mins में 20 sec के लिए किसी भी झाग वाले साबुन से अच्छे से हाथ धोएं |

७. सब्जियां और फल खाएं | Zinc और विटामिन-c दोनों को बढ़ाने की कोशिश करें

८. जानवरो से ये इंसानो को नहीं हो सकता | ये इंसान से इंसान को होता है |

९. एहतियात बरते की आपको वायरल फीवर या नार्मल कोल्ड और फ्लू ना होने पाए क्यूंकि उससे इम्युनिटी सिस्टम (रोग से लड़ने की शरीर की क्षमता) कमजोर हो जाता है | ठंडा पानी या ठन्डे पेय ना पिएं

१०. अगर आपको इन दिनों कभी भी गला ख़राब या खांसी या खराश लगे तो ऊपर बताये गए सुझावों को तुरंत प्रयोग ही करें | वायरस शरीर में ३-४ दिन इसी तरह गले में रह कर lungs में पहुंच जाता है | इसलिए बचाव के तौर पर एवं कोई भी लक्षण आने पर ऊपर बताय तरीके अपनाये |

अपना ध्यान रखें और सभी को भेजे |

#मुझे_जीवन_बाद_में_चाहिए_पहले_भोजन
                                                   -भूखा

अब दो देशों के बीच #वाइरस को लेकर #कम्पटीशन चल रहा है।#कोरोना से लेकर #हंता तक का सफर #गाँव के #गरीब #जनता ,#किसानों,.... और #मजदूरों के घरों में एक ही जुआर #चूल्हा को जलाने पर मजबूर कर दिया है।...

जिसके पेट भर सकते हैं वो तो आराम से कई दिनों तक घरों में रहे सकते हैं पर उनका हाल तो सोच, समझो और फिल करो जो दिन में खटते हैं तो शाम को उनके बच्चें भोजन करते हैं।अब #दूकान भी बंद हैं जो खुलते हैं वहाँ दैनिक वस्तुएँ ऐसे बचे जा रहे हैं जैसे वही है कोरोना का असली दवा या फिर सदियों के हानि का एक ही दिन में पूर्ति का साधन।...

बहुत दुःख होता है जब देश के बच्चे भूखे सोते हैं मेरे सामने।मैं क्या वे भी #भूख के #भयंकर रोग को अनदेखा कर देश पर आई आफत के लिए #कुर्बानी देने को तैयार हैं।पेट में रोटी पहूँचाने की जगह #सांत्वना पहूँचा।घरों में रह कर अपने देश के #राजनीतिक दलालों के दुःख- दर्द समझ रहे हैं।...

कोरोना कहाँ है? किस आदमी के पास है?...

क्या जिसको कोरोना है? वो खुद अपने परिवार के सदस्यों जैसे-माता पिता भाई बहन बच्चों को कोरोना से ग्रसित कर सकता है.... तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए मान लें यह देश ही कोरोना से पीडित व्यक्ति का घर ; तो फिर वह कैसे अपनो को अपने दुःख का हिस्सा बनाएगा?...

वह जनता है कोरोना से पहले ही हमारे गरीब भाई बहन माता पिता बच्चे भूख के तडप की वजह से अनेक रोगों का शिकार हो जाएंगे।फिर इलाज क्या ईश्वर भी उन्हें नहीं बचा सकता।क्योंकि सरकारी अस्पतालों में जाने के लिए शक्ति ,साहस व विश्वास की जरुरत होती है जो उनके पास नहीं है।...

अतः आप सभी #महान #राजनेताओं, #समाज #सेवियों, #सरकारी-#प्राइवेट #महानुभावों, #गुरुजनों-#आचार्यों , #डॉक्टरों....तथा #विद्यार्थियों-#शोधार्थियों से अतिविनम्र साहित्यिक सहृदय सविनय निवेदन है कि भूखे परिवार को "कोरोना व हंता" के कहर में कम से कम एक वक्त का भोजन प्रबंध कराने का कष्ट करें।...
                                        #आत्मीय #धन्यवाद!

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों का सेवक : #गोलेन्द्र #पटेल
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय : वाराणसी। #BHU


एक रात अंधेरी गली में
गलती से टकराना कम नहीं।
किसी रेगिस्तानी कली में
शुद्ध प्रेम रस शबनम सही।
विरोध के विरुद्ध अलि में
सौंदर्य सुगंध सर्वोत्तम वही।
आकर्षण तत्व मधु उत्पन्न किया
पुतली पलक पलंग प्रसन्न किया।
दिल के सम्यक दृष्टि में रम।
    -golendra patel


मर्द की मर्ज़ स्त्री नहीं इश्क है
दर्ज़ की दर्द की दवा दिल ही है
रात में आसमान का चादर ओढ़
जुगनू की रोशनी में खत पढ़ना
कोई मज़ाक नहीं ,मुहब्बत है मेरी

सुबह सूर्य की कृपा से देखता हूँ
नयन नदी का आकर्षण झील ही है।
बात में ख़ास गान का आदर छोड़
राग अनुराग के ध्वनि में मत गढ़ना
धूप में पका रूप ही इज्ज़त है मेरी

जिन्दगी के नाव को घाट पर लगा
घाटवाक् कर काशी का कर्षित कवि
नये समाज के लिए नये यज्ञ का हवि
डालता और कविता में रवि का छवि
प्रेम की प्यासी पृथ्वी पुस्तक है मेरी।

माँ गंगा के स्नेह सागर में शब्द स्वर
तैर रहे हैं तरंगों के संग , माँ बैठकर
देख रही है उमंगों के रंग इन्द्रधनुष में
मैं देखता जीर्ण शीर्ण अंग नदी बीच
पावन पूज्य लाचारी बेचारी नारी की।

अनेक नालों से तंग हो तस्वीर देती
अपने दर्द के अभिव्यक्ति के लिए ही
हम सभी को और भावी भविष्य को
चाहती दूरूह दूषित जल का उद्धार हो
और मैं चाहता आपको नदी से प्यार हो।

अजी गोलेन्द्र बहुत समय हो गया
चलोगे घाट से घर या अभी रहोगे
अजी आप जाओ आज काव्यगुरु
और आदरणीय विजयनाथ मिश्र जी
आ रहे हैं यहाँ जो माँ के मानसपुत्र हैं

पैरों के धूल पानी से ही धुलते हैं
पानी नदियों का हो या कुएँ का
या समुद्र का वाष्पीकरण ओस
या संसद सदन का हो बिस्लेरी
पर हमें क्या हम पंक्षी है गंगाघाट के

गंदा गङ्गा जल पीना ही धर्म है मेरा
राष्ट्रीयता का प्रतीक ही कर्म है मेरा
शिवपुत्रवाहन की संज्ञा दे महामहर्षि
सृष्टि में नभचरों के प्रति दया दृष्टि की
शून्य से विस्तार तक केवल कथा नहीं

बनारस के सड़कों से उत्पन्न संगीत
संत साहित्य से होत हुए नवगीत में
इश्के मजाज़ी से सोशल मीडिया पर
सीधे सीधे टंग रहे हैं अद्यतन अध्येतव्य
सनम अद्भुत जगत संदेश खत है तेरी।

**घाट से घर**
*गोलेन्द्र पटेल*
रचना 01/03/2020

माई हो माई तोहें जियरा पूकारे
चल अउतु घटवा से घरवा दूवारे
अँखियाँ से लोरवा बहे, जइसे बहे गंङ्गाधारा
इन्द्रधनुष टूट गयल ,भईली अनाथ बेसहारा
बीच रहिया पउँवा में चुभ गयल कष्ट कटवा
आई गईलन यमराज देखा नदियाँ के तटवा
तोहें लेई जाता बाटें स्वर्णिमरथ से सारे
यमदूत धुअवा के पथ पे नारे : "राम नाम सत्य है"
कहत चलत तेरह दिन में पहुँच गईलन तारे
माई हो.......
बेटी-बेटा रुअत ह पोता-पोती रुअत ह
तोर पतोहिया रुअत ह रुअत त सारा परिवार
ऐ माई कईसे हम चूल्हा चउका क करुणा गाई
भयलबा जईसे अधेड़ अंधन के आगे उजियार
काशी के नदीत्रयी वरुणा-अस्सी-गंङ्गा में नहाई
पिण्डदान करलन पालल कौएँ को बुलाई द्वारे
माई हो....
-गोलेन्द्र पटेल


कर्षित कृषक की होली
देख क्यों सून रहा बोली
चूल्हे पर चढ़े तवे के संग
ईंधन लकड़ी गोईठी दंग

होलिका लपट पीला रंग
लाल ,हरा व सफेद तरंग
भूख के भीतर से उत्पन्न उमंग
पेट में बज रहे नगाड़े को भंग
कर ,हर्षित की तंत्रिका तंत्र को।


दो वक्त के रोटियों के जंग में
अबीर गुलाल से अंग अंग में
फटी झुर्रियाँ दर्द सह रही हैं
धूल ने कहा ध्वनि से
मैं पैरों के नीच था
हवा ने मुझे यहाँ पहुँचाया।

उपर्युक्त दृश्य हैं सड़क के किनारे
और गाँव के कई किसानों का
बटोई में खदकते चावल की
बुद बुदाहट बच्चों के चेहरे पर
चमकता चार चाँद दिखाया।

जिसे देख कह सकता हूँ कि
आज भी कुछ हमदर्दी हैं
जो अपने हिस्से का गोझीया
बाट रहे हैं गरीबों के टोली में
साथ में मीठी खीर मुझे भी
बाटने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
-युवा कवि गोलेन्द्र पटेल







**तो**
ओ!
सूनो
तो।
दो
गूनो
जो।
रो
रहा
ढो।
धो
चिता
को।
लो
कफन
बो।
वो
भावी
गो।
ऐसा
ही
हो।
लड़कपन
में
खो-खो।
जवानी
में
भों-भों।
बुढ़ापे
में
खों-खों।
सो
तो
सावधान।
अपनी
रोटी
पो पो।
खुद
खाओ
इंसान।
किसी
पर
निर्भय
क्यों
रहते
हो
आज
आओ
प्राण
भूख
के
भूत
से
भेंट
करने।
भारत
में
भात
सदैव
दूधमुंही
के
दिन
पकते
हैं।
खेत
में
रात
भर
खटते
हैं।
किसान
और
कागज़
पर
रचते
हैं।
मोक्ष
मार्ग
कविजन।
अन्ततः
अपने
निष्कर्ष
में
कहते
हैं
जैसे
भी
हो
बुद्ध
को
पढ़ो।
-गोलेन्द्र पटेल
रचना : 11-03-2020
मो.नं.8429249326


नई रोशनी नई धुन
सोमवार, 9 मार्च 2020
काज़ी नजरुल इस्लाम की प्रसिद्ध कविता 'विद्रोही', अनुवाद- सुधा सिंह

बोलो वीर-
बोलो उन्नत मम शीश !
निहारता नत हो हिमाद्री शिखर, तव शीश !
बोलो वीर-
ब्रह्माण्ड के महाकाश को भेद,
चंद्र सूर्य ग्रह ताराओं को पीछे छोड़,
कर भेदन भूलोक, द्योलोक और गोलोक का,
खुदा के आसन सिंहासन को छिन्न कर,
विश्वविधाता के चिर आश्चर्य सदृश, उठा हूँ मैं !
भाल पर मेरे तेज रूद्र का—शोभित, जयश्री का राजतिलक !
बोलो वीर—
चिर उन्नत मम शीश !
मैं चिर दुर्दम, दुर्विनीत, नृशंस,
महाप्रलय का मैं नटराज, मैं साइक्लोन मैं ध्वंस !
मैं महाभय, मैं पृथ्वी का अभिशाप,
मैं दुर्वार,
मैं तोड़-फोड़ कर नष्ट कर दूँ सब कुछ !
मैं नियमहीन, उच्छृंखल,
मैं बहा दूँ सारे बंधन, सारे नियम, क़ानून श्रृंखलाएँ !
मैं मानूं न कोई क़ानून
मैं भरी हुई नौकाएँ डूबो दूँ, मैं तारपीडो, मैं तैरती हुआ खान !
मैं रूद्र, मैं समयपूर्व कालबैशाखी की रौद्र ओला-वृष्टि
मैं विद्रोही, मैं विद्रोही पुत्र हूँ विश्वविधाता का !
बोलो वीर—
चिर उन्नत मम शीश !
मैं झंझा, मैं तूफान,
मैं पथ में जो आए करता चूर्ण ।
मैं नृत्य-पागल छंद ,
निज ताल पर नाचता, मैं मुक्त जीवन आनंद।
मैं वज्र, मैं छायानट, मैं हिंडोल,
मैं चल-चंचल, उछल ठिठक
रास्ते पर चकित अचंभित
चिढ़कर लेता हूँ तीन कूद ;
मैं चंचल – चपल झोंका ।
जब जो चाहता है मन मेरा, मैं वही करता हूँ भाई,
मैं शत्रु को देता हूँ धिक्कार और मृत्यु से करता हूँ लड़ाई ,
मैं उन्माद मैं झंझा !
मैं महामारी, भय हूँ इस धरती का ;
मैं शासन-त्रासन, संहार मैं उष्ण चिर – अधीर !
बोलो वीर—
बोलो चिर उन्नत मम शीश !
मैं चिर दुरंत दुर्मद,
मैं दुर्दम, मेरे प्राणों का प्याला मद - पूरित सदा।
मैं होम – शिखा, मैं अग्नियुक्त जमदग्नि,
मैं यज्ञ, मैं पुरोहित, मैं स्वयं अग्नि।
मैं सृष्टि, मैं ध्वंस, मैं जीवन, मैं मृत्यु,
मैं अवसान, मैं निशावसान।
मैं इंद्राणी-पुत्र, हाथों में चंद्र भाल पर सूर्य
मेरे एक हाथ में मधुर बाँसुरी दूसरे में रण-तूर्य ;
मैं नील-कंठ, व्यथा – समुद्र मंथन का विष किये पान।
मैं व्योमकेश, स्वच्छंद गंगोत्री को किये धारण ।
बोलो वीर—
चिर उन्नत मम शीश !
मैं संन्यासी, मैं सुर-सैनिक,
मैं युवराज, राजवेश में बैरागी।
मैं खानाबदोश, मैं चंगेज़,
मैं अपने अलावा किसी को करता नहीं सलाम !
मैं वज्र, मैं ईशान-विषाण ओंकार,
मैं ईसाफील का श्रृंगार महा हुंकार,
मैं पिनाक-पाणि का डमरू - त्रिशूल, धर्मराज का दण्ड,
मैं चक्र औ महाशंख, मैं प्रणव नाद प्रचंड !
मैं आक्रोशित दूर्वासा, विश्वामित्र का शिष्य,
मैं दावानल की दाह, दहन करूंगा विश्व।
मैं उन्मुक्त हँसी - उल्लास, मैं सृष्टि – शत्रु महात्रास,
मैं महाप्रलय के द्वादस रवि का राहू ग्रास !
मैं कभी प्रशान्त कभी अशान्त अनंत स्वेच्छाचारी,
मैं युवा, नव रक्त मेरा, मैं विधि का दर्पहारी !
मैं प्रभंजन का उच्छ्वास, मैं सागर का महाकल्लोल,
मैं उज्ज्वल, मैं प्रोज्ज्वल,
मैं उच्छल छल-छल जल, चंचल लोल लहरों की पेंग !
मैं द्रौपदी की मुक्त वेणी, तन्वी नयनों की आग
मैं युवती – हृदय का उद्दाम प्रेम, मैं धन्य !
मैं उन्मन मन उदासी,
मैं विधवा - हृदय का करुण विलाप निःश्वास, निरूत्साही का हताश ।
मैं पथवासी औ चिर बेघर की वंचित व्यथा,
मैं अपमानित की मर्म-वेदना, विष-ज्वाल, प्रिय-लांछितों का नव उत्साह
मैं अभिमानी, चिर क्षुब्ध हृदय की कातरता, व्यथा सघन
चित्त चुंबन चौर्य कंपन, मैं युवती का थर थर प्रथम परस !
मैं सलज्ज प्रिया की चकित चाह, चोरी से देखना क्षण-क्षण,
मैं चंचल युवती का प्यार, कंगन-चूड़ी की खन-खन !
मैं चिर – शिशु, चिर किशोर,
मैं अज्ञातयौवना ग्राम बाला का कस – लिपटा आँचल !
मैं उत्तरी मलयानिल उदार पुरवाई,
मैं चारण कवि की गंभीर रागिनी, वेणु बीना पर गाया गीत ।
मैं अतृप्त आकूल प्यास, मैं रौद्र – रूद्र- रवि
मैं मरू प्रांतर का झरना, मैं धरा की श्याम हरित छवि !
मैं तूरीयानन्द उन्मन् , मैं उन्मद् !
मैं सहसा परिचित आत्म , मुक्त बंध !
मैं उत्थान, मैं पतन, मैं बेसुध चित्त चेतन ,
मैं जग तोरण पर वैजयंती, मानव जय केतन ।
दौड़ा करता हूँ झंझा का करताल बजाता,
हाथों में मेरे स्वर्ग और मर्त्य,
ताजी बोरराक और उच्चश्रवा वाहन मेरे
हिम्मत से हूंकारता बढ़ता हूँ आगे !
मैं धरती के सीने पर आग्नेय पर्वत, वाड़वाग्नि, कालानल !
मैं पाताल की उन्मत्त अग्नि-पत्थरों का घर्षण- कोलाहल !
मैं विद्युत गति, लेता ऊँची कूद,
आततायी धरती पर भूकंप वाही मैं।
पकड़ता हूँ वासुकी का फन झपटकर
पकड़ता हूँ स्वर्गदूत जिब्राइल का आग उगलता सर्प,
मैं देवशिशु, मैं चंचल,
मैं धृष्ट, दाँतों से खींचता हूँ विश्व माँ का आँचल !
मैं अर्फ़ियासर की बाँसुरी,
महासिंधु की उत्ताल उमड़-घुमड़।
मैं दे निद्रा का चुंबन, सुलाता हूँ विश्व
निद्रा जो पसरती है मेरी बाँसुरी की तान से
मैं श्याम के हाथों की बाँसुरी।
मैं क्रुद्ध हो दौड़ता हूँ, छूने को महाकाश,
भय से सप्त वैतरणी पार नरक, काँप मंद मलिन हो जाता !
मैं अखिल विश्व का विद्रोह-दूत !
मैं सावन की बाढ़,
कभी बनाता हूँ धरती को वरेण्य, कभी विपुल ध्वंस धन्य-
मैं छीन लाऊँगा विष्णु-वक्ष से युगल कन्या !
मैं अन्याय, मैं उल्का, मैं शनि,
मैं छिन्नमस्ता चण्डी, मैं रण में सर्वनाश,
मैं नर्काग्नि में बैठ विहँसता मधुर हास !
मैं मृण्मय, मैं चिन्मय,
मैं अजर, अमर, अक्षय, मैं ही अव्यय !
मैं मानव, दानव, देवता का भय,
विश्व में मैं चिर-दुर्जेय,
जगदीश्वर, ईश्वर मैं, पुरुषोत्तम सत्य,
मैं ता थैया ता थैया कर दौड़ता फिरता – स्वर्ग-पाताल-मर्त्य !
मैं उन्माद, मैं उन्माद !!
मैंने पहचाना है आज स्वयं को, खुल गए सब बंध मेरे !!
मैं परशुराम का कठोर कुठार
निःक्षत्रिय करूँगा विश्व, लाऊँगा शांति शांत उदार !
मैं बलराम के कंधे का हल।
नव सृष्टि के महानंद से पूरित मैं ,
उखाड़ फेंकूँगा पराधीन विश्व की समस्त अवहेलना।
महाविद्रोही मैं रण-क्लान्त
मैं उसी दिन होऊँगा शान्त,
जब चारों तरफ पीड़ितों का क्रंदन गूँजेगा नहीं-   
अत्याचारियों की खडग्-कृपाण-ध्वनि, भीषण रणभूमि में देगी नहीं सुनाई-
विद्रोही रण क्लान्त
मैं उसी दिन होऊँगा शान्त ।
मैं विद्रोही भृगु , ईश्वर के हृदय पर अंकित करूँगा पद-चिह्न !
मैं स्रष्टा-सूदन, शोक-ताप हर लेने वाली काल्पनिक दुनिया करूँगा छिन्न-भिन्न!
मैं चिर-विद्रोही-वीर-
विश्व को पीछे छोड़ उठा हूँ अकेला लेकर उन्नत शीश !





















सुधा सिंह, प्रोफेसर,हिंदी विभाग,दिल्ली विश्वविद्यालय पर 6:34 am
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2 टिप्‍पणियां:
डॉ रमेश यादव9 मार्च 2020 को 10:27 am
मैम बहुत सटीक अनुवाद हुआ है। जैसा कि मुझे लगा मैं मौलिक रचना पढ़ रहा हूँ। बहुत बधाई मैम💐
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सुधा सिंह, प्रोफेसर,हिंदी विभाग,दिल्ली विश्वविद्यालय9 मार्च 2020 को 7:59 pm
बहुत बहुत आभार आपका रमेश।
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