Thursday, 8 May 2025

चंदौली में चकबंदी || चकबंदी से परेशान ग़रीब किसान ध्यान दें! || जो किसान उड़ान चक से दुखी हैं || भू माफिया 'चकबंदी के चम्मच' से मलाई खाते हैं।

 

जो किसान उड़ान चक से दुखी हैं

प्रिय किसान साथियों, उत्तर प्रदेश चकबंदी अधिनियम, 1953, उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को विनियमित करने और किसानों को लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चकबंदी, जिसे ज़मीन समेकित करना भी कहते हैं, चकबंदी वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा किसानों के बिखरे हुए खेतों को एक साथ करके, उन्हें एक ही बड़े खेत में बदल दिया जाता है अर्थात् चकबंदी से किसानों के बिखरे हुए खेतों को एक साथ लाकर एक बड़ा और सुव्यवस्थित खेत बनाया जाता है। यह प्रक्रिया किसानों को खेती करने में आसानी प्रदान करती है और उत्पादन में वृद्धि में मदद करती है, लेकिन चकबंदी के दौरान कुछ किसानों को अपने पैतृक भूमि से दूर होना पड़ सकता है, उन्हें बिखरे हुए खेतों की जगह कम या अलग जगह पर जमीन मिल सकती है, जिससे उन्हें भावनात्मक नुकसान हो सकता है। बहरहाल, यदि चकबंदी से प्रशासन की चौकसी नज़र हटती है, तो भू माफिया 'चकबंदी के चम्मच' से मलाई खाते हैं।

किसानों की सहूलियत के लिए शुरू की गई चकबंदी की प्रक्रिया काफी अहम होती है, लेकिन इस प्रक्रिया की जानकारी किसानों को काफी कम होती है या गाँव स्तर पर कुछ प्रभावशाली लोग इस प्रक्रिया से आम लोगों को दूर रखना ही बेहतर समझते हैं। अगर किसान लगातार चकबंदी प्रक्रिया पर नज़र रखें और जानकारी लेते रहे तो चकबंदी उनके लिए सहूलियत भरी हो सकती हैं।

चकबंदी लेखपाल गाँव में जाकर अधिनियम की धारा-7 के तहत भू-चित्र संशोधन, स्थल के अनुसार करता है और चकबंदी की धारा-8 के तहत पड़ताल का काम करता है, जिसमें गाटो की भौतिक स्थिति, पेड़, कुओं, सिंचाई के साधन आदि का अकंन आकार पत्र-दो में करता है। इसके अलावा खतौनी में पाई गई अशुद्धियों का अंकन आकार-पत्र 4 में करता है। प्रारंभिक स्तर पर की गई पूरी कार्यवाहियों से खातेदार को अवगत कराने के लिए अधिनियम की धारा-9 के तहत आकार-पत्र 5 का वितरण किया जाता है, जिसमें खातेदार अपने खाते की स्थिति और गाटो के क्षेत्रफल की अशुद्धियाँ जान जाता है। धारा-10 के तहत पुनरीक्षित खतौनी बनाई जाती है, जिसमें खातेदारों की जोत सम्बन्धी, गलतियों को शुद्ध रूप में दर्शाया जाता है। सहायक चकबंदी अधिकारी द्वारा चकबंदी समिति के परामर्श से चकबंदी योजना बनाई जाती है और धारा-20 के तहत आकार पत्र-23 भाग-1 का वितरण किया जाता है। चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी द्वारा प्रस्तावित चकबंदी योजना को धारा-23 के तहत पुष्ट किया जाता है, जिसके बाद नई जोतों पर खातेदारों को कब्ज़ा दिलाया जाता है। अधिनियम की धारा-27 के तहत रिकॉर्ड (बंदोबस्त) तैयार किया जाता है, जिसमें आकार पत्र-41 और 45 बनाया जाता है। नए नक़्शे का निर्माण किया जाता है, जिसमें पुराने गाटों के स्थान पर नये गाटे बना दिए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया की हर स्तर पर जाँच की जाती है। अगर कोई खातेदार इस प्रक्रिया से खुश नहीं है, तो खातेदार धारा-48 के तहत उप संचालक चकबंदी के न्यायालय में निगरानी वाद दायर कर सकता है।

मतलब, अगर कोई चकबंदी से खुश नहीं है, तो एसीओ के बाद चकबंदी अधिकारी (सीओ) के यहाँ अपील कर सकता है। इसके बाद एसओसी फिर, डीडीसी के यहाँ अपील की जाती है। यहाँ भी बात न बने तो हाई कोर्ट में अपील की जाती है। चकबंदी से संबंधित शिकायत करने के लिए, आप सबसे पहले चकबंदी अधिकारी (Settlement Officer, Consolidation) से संपर्क कर सकते हैं। अगर इससे समाधान न हो, तो आप राजस्व विभाग, SDM या न्यायालय में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अगर भूमि विवाद गंभीर है या विवाद बढ़ रहा है, तो SDM (Sub Divisional Magistrate) के माध्यम से धारा 144 या 145 CrPC लगवाई जा सकती है। यदि धोखाधड़ी और जालसाजी भूमि के अवैध कब्जे का मामला है, तो सबसे पहले धारा 420 के तहत थाने में शिकायत दर्ज करना और फिर नागरिक मामले की प्रक्रिया शुरू करना सुझाया जाता है।

ऑनलाइन शिकायत के लिए, आप चकबंदी निदेशालय वेबसाइट पर जा सकते हैं या उत्तर प्रदेश के राज्य पोर्टल पर जा सकते हैं। आप चकबंदी निदेशालय, उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक वेबसाइट upconsolidation.gov.in पर भी जा सकते हैं। आप भूमि रिकॉर्ड देखने और चकबंदी प्रक्रिया की प्रगति की जाँच करने के लिए भूलेख यूपी पोर्टल (https://upbhulekh.gov.in/) पर जा सकते हैं।

चकबंदी से परेशान ग़रीब किसान ध्यान दें!

जो ग़रीब किसान चकबंदी से परेशान हैं, जिनके साथ ग़लत हुआ है, जिनको भी लग रहा है कि उनकी खतौनियों, गाटों (खसरा संख्याओं) में अशुद्धियाँ हैं, कुछ गड़बड़ी हुई है, जिनको भी लग रहा है कि ग्रामसभा खजूरगाँव की चकबंदी में धांधलीबाज़ी की जा रही है, जिनको भी लग रहा है कि उनका चकआउट ठीक नहीं है, रोड के किनारे का जिनका भी खेत किसी ने चकबंदी अधिकारियों या ग्रामभूमि प्रबंध समिति या दलालों या दलबंदियों या गुटबंदियों को घूस-घास (पैसा/मोटी रकम/रिश्वत) देकर अपने नाम करा लिया है या जिनको भी उपजाऊ खेत के बदले में ग़लत तरीके से बंजर खेत या ताल-तलई वाला खेत या खलार खेत दिया जा रहा है, जिनको भी सभी आकार पत्र समय पर नहीं मिले हैं, वे 12 मई को शाम 4 बजे से 'बौद्ध महाविहार खजूरगाँव' में हमसे संपर्क कर सकते हैं। याद रहे कि ग़रीब किसानों के साथ ग़लत करने वाले चकबंदी से संबंधित भ्रष्ट अधिकारी भी भारतीय दण्ड संहिता, धारा-167 (Section:167 IPC) के तहत 3 साल के लिए जेल जा सकते हैं।..... धन्यवाद!


आपका: गोलेन्द्र पटेल 



Tuesday, 22 April 2025

पहलगाम (कविता) : गोलेन्द्र पटेल


 पहलगाम


हमें बाँटने, काँटने, लड़ाने की कोशिशें जारी हैं 


बेहद दुखद है

इस वक्त भाषा से भूगोल तक 

चीख़ और चुप्पी के बीच 

आँसू की ऊँची अनुगूँज है—

“जाति नहीं, धर्म पूछकर गोली मारी” 

इस वाक्य का ट्रेंडिंग में होना 

साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति का घड़ियाली आँसू रोना है 


स्याह संवेदना की साहसी कलम कैदी है 

बंदूक और बारूद के बीच कुर्सी मस्त है 

क्योंकि झूठ के आगे सत्य पस्त है

हम मासूम बेगुनाहों की दर्दनाक मौत से संत्रस्त हैं

हमारा मन आहत है, तन नहीं 

इस आतंकी हमले ने देश को स्तब्ध कर दिया है 

जनतंत्र का तंत्र निःशब्द है, लेकिन जन नहीं 


यह आतंकवादी हमला क्रूर, बर्बर, नृशंस, भयानक 

और हृदयविदारक है 

हम इस घटना से दुखी और हैरान हैं

हम इस कुकृत्य, हत्यकांड की कड़ी भर्त्सना करते हैं

हम सरकार की निंदा करते हैं 

क्योंकि हत्या हर हालत में निंदनीय है

हम संवेदनशील इंसान हैं 

हमें पता है कि जहाँ कुशासन है 

वहाँ हिंसा, हत्या, पलायन, अराजकता फैली हुई है

और बहुत सघन अँधेरा है 

हम असुरक्षित हैं 

क्योंकि हमें भूख, भय और भूतों ने चारों ओर से घेरा है 


हमसे पूछ रहा है संविधान,

“अमृत महोत्सव के मौसम में जाति, धर्म, भाषा, भूगोल निरपेक्ष कौन है?”

पूछ रहा है जहान,

“क्या पहलगाम आतंकी हमला 

अपने राजनीतिक फलितार्थ में 

पुलवामा का अगला संस्करण है?”


न्याय की गुहार लगतीं मृतात्माएँ कहती हैं 

कि हत्यारे ही नहीं, 

बल्कि उनके रक्षक भी मानवता के दुश्मन हैं

हमारी पीड़ा के प्रगीत शोक वचन हैं


हम निर्दोष पीड़ितों के परिवारजनों के दुःख में शामिल हैं

हम टूटे हुए निराश सिपाही हैं

हम मानवीय वेदना की गवाही हैं!


(©गोलेन्द्र पटेल /23-04-2025)

संपर्क: गोलेन्द्र पटेल (पूर्व शिक्षार्थी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।/जनपक्षधर्मी कवि-लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)

डाक पता - ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, तहसील-मुगलसराय, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।

पिन कोड : 221009

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ईमेल : corojivi@gmail.com

Monday, 7 April 2025

क्या मायावती और चंद्रशेखर आजाद अंबेडकरवादी हैं?

जो बौद्ध नहीं हैं, वो अंबेडकरवादी नहीं हैं। 

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हम नगीना सांसद मा० श्री चंद्रशेखर आजाद जी को ही नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री, आयरन लेडी मा० सुश्री बहन मायावती जी को भी अंबेडकरवादी नहीं मानते हैं, क्योंकि ये दोनों हिंदू हैं पूरी तरह बौद्ध नहीं! क्या बहन जी ने कभी किसी सार्वजनिक मंच से विश्वरत्न बोधिसत्व बाबा साहब डॉ० भीमराव अंबेडकर जी की 22 प्रतिज्ञाओं का वचन किया है? क्या बहन जी ने कभी कहा है कि मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगी और न ही मैं उनकी पूजा करूँगी। मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, उनमें कोई आस्था नहीं रखूँगी और न ही मैं उनकी पूजा करूँगी। मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगी और न ही मैं उनकी पूजा करूँगी। मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करती हूँ।... क्या किसी सार्वजनिक मंच से बहन जी ने मान्यवर कांशीराम जी की प्रतिज्ञाओं का वाचन किया है?....बहन जी आदरणीय नेता हैं अनुकरणीय नहीं। यही बात चंद्रशेखर आजाद जी पर भी लागू होती है, क्या चंद्रशेखर आजाद जी ने बाबा साहब डॉ० भीमराव अंबेडकर की ये बातें किसी सार्वजनिक मंच से कहे हैं कि “तुम्हारी मुक्ति का मार्ग धर्मशास्त्र व मन्दिर नहीं है, बल्कि तुम्हारा उद्धार उच्च शिक्षा व्यवसायी बनाने वाले रोजगार तथा उच्च आचरण व नैतिकता में निहित है। तीर्थयात्रा, व्रत, पूजा-पाठ व कर्मकांडों में कीमती समय बर्बाद मत करो। धर्मग्रन्थों का अखण्ड पाठ करने, यज्ञों में आहुति देने व मन्दिरों में माथा टेकने से तुम्हारी दासता दूर नहीं होगी। तुम्हारे गले में पड़ी तुलसी की माला गरीबी से मुक्ति नहीं दिलायेगी। काल्पनिक देवी-देवताओं की मूर्तियों के आगे नाक रगड़ने से तुम्हारी भुखमरी दरिद्रता व गुलामी दूर नहीं होगी। अपने पुरखों की तरह तुम भी चिथडे मत लपेटो, दडबे जैसे घरों में मत रहो और इलाज के अभाव में तड़प-तड़प कर जान मत गँवाओं। भाग्य व ईश्वर के भरोसे मत रहो, तुम्हें अपना उद्धार खुद ही करना है। धर्म मनुष्य के लिए है, मनुष्य धर्म के लिए नहीं और जो धर्म तुम्हें इन्सान नहीं समझता, वह धर्म नहीं अधर्म का बोझ है। जहाँ ऊँच-नीच की व्यवस्था है। वह धर्म नहीं, गुलाम बनाये रखने की साजिश है।” क्या आपने इस पर कभी विचार किया? आख़िर जो मीडिया मान्यवर कांशीराम जी को नहीं दिखाती थी, वो चंद्रशेखर आजाद जी को क्यों ख़ूब दिखा रही है?


निःसंदेह जो बौद्ध नहीं हैं, वो अंबेडकरवादी नहीं हैं। हमारी नज़र में कोई हिन्दू अंबेडकरवादी नहीं हो सकता है, क्योंकि बाबा साहब अंबेडकर हिन्दू काल्पनिक देवी-देवताओं के ख़िलाफ़ थे!

—गोलेन्द्र ज्ञान 

क्या तथागत बुद्ध श्रीराम से बड़े वोट बैंक हैं?👉विस्तृत जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें :-

https://golendragyan.blogspot.com/2025/04/blog-post.html

संपर्क: गोलेन्द्र पटेल (पूर्व शिक्षार्थी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।/जनपक्षधर्मी कवि-लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)

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Wednesday, 2 April 2025

क्या तथागत बुद्ध श्रीराम से बड़े वोट बैंक हैं?

शीर्षक : क्या तथागत बुद्ध श्रीराम से बड़े वोट बैंक हैं?

यह सवाल ख़ुद से है कि कहीं हमने बुद्ध, धम्म, संघ के शरण में जाने में जल्दबाज़ी तो नहीं की न? क्योंकि, बौद्ध धर्म अपनाने के संदर्भ में मार्गदाता पुरखे याद आ रहे हैं!

बाबा साहब डॉ॰ भीमराव अंबेडकर ने 14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाया और उनको महापरिनिर्वाण 6 दिसंबर, 1956 को प्राप्त हुआ। यानी, बाबा साहब ने लगभग 64-65 वर्ष की आयु में बौद्ध धर्म अपनाया।

पेरियार ललई सिंह यादव ने 1967 में लगभग 56 वर्ष की आयु में बौद्ध धर्म अपनाया और उनको परिनिर्वाण 07 फरवरी 1993 को प्राप्त हुआ।

सन 2002 में, मान्यवर कांशीराम जी ने 14 अक्टूबर 2006 को डॉक्टर अम्बेडकर के धर्म परिवर्तन की 50 वीं वर्षगांठ के मौके पर बौद्ध धर्म ग्रहण करने की अपनी मंशा की घोषणा की थी, लेकिन उनको परिनिर्वाण 9 अक्टूबर 2006 को प्राप्त हुआ। यानी कांशीराम लगभग 72 वर्ष की आयु में बौद्ध धर्म अपनाना चाहते थे।

यह पुरखों से तुलना नहीं, बल्कि उनसे संवाद की प्रक्रिया में ख़ुद से पूछा गया सवाल है कि कहीं हमने बुद्ध, धम्म, संघ के शरण में जाने में जल्दबाज़ी तो नहीं की न?

पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री बहन मायावती जी ने बौद्ध धर्म कब अपनाया? (बहन जी का जन्म भी हिंदू परिवार में हुआ है!)

उभरते हुए बहुजन नेता, युवाओं के चहेते नगीना सांसद मा० चंद्रशेखर आजाद जी ने इंटरव्यू एवं पॉडकास्ट में कहा है कि वे एक रविदसिया हिन्दू हैं!

अंत में एक और सवाल, क्या तथागत बुद्ध श्रीराम से बड़े वोट बैंक हैं? बुद्ध-अंबेडकर बहुजन राजनीति के केंद्र में ही नहीं, बल्कि जातंकवादियों की राजनीति के केंद्र में भी हैं।

—गोलेन्द्र ज्ञान 

संपर्क: गोलेन्द्र पटेल (पूर्व शिक्षार्थी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।/जनपक्षधर्मी कवि-लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)

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Thursday, 20 March 2025

समय का संताप || विश्व कविता दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनायें! || 21 March

 समय का संताप 

हालात की लात
परिस्थिति की मार
बेरोज़गारी की चोट
पीड़ा का प्रहार
शिक्षकों की ईर्ष्या
सहपाठियों का व्यंग्य
समय का संताप सह कर बड़ा हुआ है
मेरा कवि
इतना बड़ा हुआ है
कि अब संत कवियों को छोड़कर
अपने से किसी को बड़ा कवि मानता ही नहीं है
न वाल्मीकि को, न वेदव्यास को
न गुरु को, न गार्जियन को
न आचार्य को, न अभिभावक को
न मित्र को, न मार्गदर्शक को
न प्रेमिका को, न पथप्रदर्शिका को
किसी को भी नहीं!

मेरे कवि का दुःख ही उसका दीपक है
मेरा कवि मेरा प्रतिरूप है
उसी की कविता से
इस कोहरे में मेरे पास धूप है!

(®गोलेन्द्र पटेल / 21-03-2025)

21 मार्च : विश्व कविता दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनायें! 

संपर्क: गोलेन्द्र पटेल (पूर्व शिक्षार्थी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।/जनपक्षधर्मी कवि-लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)

डाक पता - ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, तहसील-मुगलसराय, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।

पिन कोड : 221009

व्हाट्सएप नं. : 8429249326

ईमेल : corojivi@gmail.com

Wednesday, 19 March 2025

Golendrism (गोलेन्द्रवाद) का Flag (ध्वज)

Golendrism (गोलेन्द्रवाद) का Flag (ध्वज) :
(नवीनतम) 
जीवन में रंगों का महत्व बहुत गहरा और बहुआयामी है। रंग न केवल हमारे आसपास की दुनिया को सुंदर बनाते हैं, बल्कि हमारे भावनात्मक, मानसिक, धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, साहित्यिक जीवन पर भी प्रभाव डालते हैं। रंग जीवन को अर्थ, सुंदरता और भावनात्मक गहराई देते हैं। वे सिर्फ दृश्य अनुभव नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का एक अभिन्न अंग हैं। मानवीय रंग सभी प्राणियों के प्रति दया, सहानुभूति और समानुभूति दिखाना के लिए प्रेरित करते हैं। ये रंग मानवीय मूल्यों जैसे पीड़ा, प्रसन्नता, ज्ञान, प्रेम, स्वाभिमान, समता, समानता, स्वतंत्रता, न्याय और एकता के प्रतीक हैं। गोलेन्द्रवाद में जीवन के विभिन्न वैश्विक रंग शामिल हैं। “गोलेन्द्रवाद मानवीय जीवन जीने की पद्धति है, गोलेन्द्रवादी दर्शन जाति, धर्म, भाषा एवं भूगोल निरपेक्ष है, यह पूरी तरह मानवतावाद पर केंद्रित वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। गोलेन्द्रवाद समय-सापेक्ष वैज्ञानिक दर्शन है, मानवतावादी दृष्टिकोण है।” गोलेन्द्रवादी ध्वज में 7 खाने और 9 रंग हैं, वैसे ‘ग्लोबल’ में सभी रंग और सभी देशों का ध्वज है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, यहाँ संविधान ही सर्वोपरि है। तिरंगे के नीचे ही सब ध्वज हैं। तिरंगा ही सभी ध्वजों का मार्गदर्शक/पथप्रदर्शक/गुरु/शिक्षक है। बहरहाल, गोलेन्द्रवादी ध्वज में ग्लोबल में सभी देशों के ध्वज, भारत का मानचित्र, भारत का राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), अशोक चक्र, अशोक स्तंभ शीर्ष, आसमान में जहाज, संविधान पढ़ती हुई स्त्री, विज्ञान के दृश्य, किसान, मज़दूर उपस्थित हैं। इसमें तिरंगा और संविधान शिक्षक की भूमिका में हैं।आप एलोरा की गुफा-12 के 7 खाने (पट्टियों) को #सप्तऋषि/सप्तबुद्ध/सप्ततथागत/ ज्ञान के सप्तसमुंदर से जोड़ कर समझें। सप्तबुद्ध हैं क्रमशः विपश्यी, सिखी, विश्वभू, क्रकुच्छंद, कनकमुनि, कश्यप और शाक्यमुनि (तथागत गौतम बुद्ध) हैं।

बुद्ध की धरती पर ये 9 रंग 9 ग्रहों को दर्शाता है, बौद्ध धर्म में संख्या 9 को ज्ञान, करुणा और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है, साथ ही यह आत्मज्ञान और उच्च चेतना का प्रतिनिधित्व करता है। बौद्ध धर्म में बुद्ध के 9 गुणों का भी उल्लेख है। बुद्ध के नौ गुण हैं: भगव (धन्य), योग्य, पूर्ण आत्मज्ञानी, ज्ञान और आचरण से युक्त, सौभाग्यशाली, लोकों का ज्ञाता, शिक्षा योग्य मनुष्यों को अद्वितीय रूप से प्रशिक्षित करने वाला, देवताओं और मनुष्यों का गुरु, प्रबुद्ध और धन्य। 

अशोक का सिंह स्तंभ, भारत के सारनाथ में, लगभग  250 ईसा पूर्व, मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए एक स्तंभ का शीर्ष या शीर्ष है। चार एशियाई शेर एक गोलाकार एबेकस पर पीठ से पीठ सटाकर खड़े हैं । प्रत्येक शेर के नीचे नैतिक कानून का बौद्ध चक्र (धम्मचक्र) उभरा हुआ दिखाई देता है। चक्रों के बीच चार जानवर दिखाई देते हैं- घोड़ा, बैल, हाथी और शेर। एबेकस के नीचे वास्तुकला की घंटी , एक शैलीगत उल्टा कमल है।

गोलेन्द्रवादी ध्वज में इन रंगों का मतलब और महत्व निम्नलिखित हैं।

1).

•लाल रंग — यह रंग शक्ति, स्फूर्ति, प्रेम, ज्ञान, सदाचार, गरिमा और साहस का प्रतीक है। अर्थात् यशसिद्धी, शहाणपण, सदाचार, संपन्नता व प्रतिष्ठा यांचे प्रतीक आहे। लाल रंग — शौर्य और साहस का प्रतिक है! लाल रंग: ऊर्जा, जोश, प्यार, शक्ति, खतरा, गुस्सा का प्रतीक है! आधुनिकता को दर्शाता है।

2).

•नीला रंग — यह रंग शांति, दयालु स्वभाव, एवं प्रेम का प्रतीक है। अर्थात् प्रेमळवृत्ती, दयाळूपणा, शांती आणि वैश्विक करुणा यांचे प्रतीक आहे। नीला रंग — शांति एवं प्रेम का प्रतीक है और गहरे नीले रंग का अशोक चक्र गतिशीलता का प्रतिनिधित्व करता है। नीला रंग: शांति, विश्वास, सच्चाई, शीतलता का प्रतीक है।

3).

•पीला रंग — यह रंग, पवित्रता, तेज और उत्साह का प्रतीक है। यह रंग मध्यम मार्ग को प्रदर्शित करता है। बुद्ध के आत्मज्ञान से मिलने वाला प्रकाश का प्रतिनिधित्व करता है। अर्थात् मध्यम मार्ग, टोकाची भूमिका त्याज्य, निश्चल शांतता यांचे प्रतीक आहे। पिला रंग — तेज और उत्साह का प्रतीक है! पीला रंग: खुशी, आशावाद, ऊर्जा, चेतावनी का प्रतीक है! 

 4).

•गुलाबी रंग — यह सौभाग्य, प्यार और खुशी का प्रतीक है। साथ ही, यह स्त्री शक्ति, स्त्रीत्व, कोमलता और करुणा का भी प्रतीक है। गुलाबी रंग को माता महामाया का प्रतीक माना जाता है। गुलाबी रंग को स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती का प्रतीक माना जाता है। गुलाबी रंग को शांति, करुणा, आशावाद और रचनात्मकता से जोड़ा गया है। गुलाबी रंग को उत्सव, उल्लास, कोमलता और स्वभाव की सरलता का प्रतीक माना जाता है।

5).

•नारंगी रंग — यह रंग ज्ञान, ऊर्जा, उत्साह और रचनात्मकता का प्रतीक है। यह रंग प्रज्ञा और प्रेम के प्रकाश का प्रतीक है। नारंगी रंग स्त्रियों के लिए हिंसारहित बेहतर भविष्य का प्रतीक है। नारंगी रंग: खुशी, उत्साह, रचनात्मकता, गर्मजोशी का प्रतीक है।

6).

•काला रंग — यह रंग अन्याय के ख़िलाफ़ न्याय की आवाज़ का प्रतीक है। काला रंग प्रकाश की अनुपस्थिति है, अंधकार का प्रतीक है। काला रंग दुख और शोक के निवारण का प्रतीक है। काला रंग: शक्ति, रहस्य, दुख, शोक का प्रतीक है।

7).

•सफेद रंग — यह रंग शुद्धता, सादगी, स्पष्टता, त्याग, पवित्रता, शुद्धता और निर्मलता का प्रतीक है, यह वास्तविक जीवन को प्रदर्शित करता है। सफेद रंग शांति, सत्य, अहिंसा, त्याग और पवित्रता का प्रतीक है। अर्थात् पांढरा रंग — धम्म शुद्धता, सर्वत्र स्वातंत्र्यभिमुखताव निर्मलता यांचे प्रतीक आहे। यह रंग सत्य, शांति और पवित्रता का प्रतीक है। सफ़ेद रंग - शांति, सत्य, पवित्रता, और सबका साथ-सबका प्रयास का प्रतीक है। सफेद रंग: शुद्धता, शांति, शुरुआत, निर्दोषिता का प्रतीक है।

8).

•हरा रंग — यह आशावाद, नई शुरुआत, स्वास्थ्य, ताज़गी, उर्वरता, वृद्धि, हरियाली, संपन्नता और शुभता का प्रतीक है। यह रंग उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाता है। यह रंग भूमि की उर्वरता, वृद्धि और शुभता को दर्शाता है और हरा रंग मानवता का प्रतीक है। हरा रंग: प्रकृति, समृद्धि, स्वास्थ्य, विकास, खुशी का प्रतीक है।

9).

• केसरिया रंग — केसरी रंग — त्याग, बलिदान, ज्ञान, शुद्धता, सेवा, शौर्य, और वीरता और करुणा का प्रतीक है, यह रंग बुद्ध के ज्ञान की शक्ति और धम्म के समृद्ध अर्थ और उसकी चमक को प्रदर्शित करता है। अर्थात् कषाय रंग - भगवान बुद्ध की विभिन्न शरीर धातुओं को धम्म रश्मियों के प्रतीक समझे जाते हैं। केसरी रंग — त्याग और करुणा का प्रतीक है ! यह केसरिया रंग देश की ताकत, साहस और संस्कृति को दर्शाता है, यह रंग शक्ति और आत्मविश्वास को दर्शाता है। केसरिया रंग - देश की शक्ति, साहस, त्याग और बलिदान का प्रतीक है।


बुद्ध के 9 गुण :-

भगव (धन्य):

बुद्ध को धन्य माना जाता है क्योंकि वे सभी बुराइयों और दोषों से मुक्त हैं, और उनकी पूजा मनुष्य और देवता करते हैं. 


योग्य:

बुद्ध को योग्य माना जाता है क्योंकि वे सभी प्राणियों के लिए कल्याणकारी हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं. 


पूर्ण आत्मज्ञानी:

बुद्ध को पूर्ण आत्मज्ञानी माना जाता है, क्योंकि उन्होंने स्वयं ज्ञान प्राप्त किया है और वे दूसरों को भी ज्ञान प्राप्त करने में मदद करते हैं. 


ज्ञान और आचरण से युक्त:

बुद्ध ज्ञान और आचरण से युक्त हैं, जिसका अर्थ है कि वे ज्ञान को केवल सिद्धांत रूप में नहीं जानते हैं, बल्कि वे इसे अपने जीवन में भी लागू करते हैं. 


सौभाग्यशाली:

बुद्ध को सौभाग्यशाली माना जाता है क्योंकि वे सभी प्राणियों के लिए एक प्रेरणा हैं और वे हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं. 


लोकों का ज्ञाता:

बुद्ध लोकों का ज्ञाता हैं, जिसका अर्थ है कि वे सभी प्राणियों की प्रकृति और उनके दुखों के कारणों को जानते हैं. 


शिक्षा योग्य मनुष्यों को अद्वितीय रूप से प्रशिक्षित करने वाला:

बुद्ध शिक्षा योग्य मनुष्यों को अद्वितीय रूप से प्रशिक्षित करने वाले हैं, जिसका अर्थ है कि वे सभी मनुष्यों को ज्ञान प्राप्त करने में मदद करते हैं, चाहे वे कोई भी हों. 


देवताओं और मनुष्यों का गुरु:

बुद्ध देवताओं और मनुष्यों के गुरु हैं, जिसका अर्थ है कि वे सभी प्राणियों के लिए एक मार्गदर्शक हैं. 


प्रबुद्ध और धन्य:

बुद्ध प्रबुद्ध और धन्य हैं, जिसका अर्थ है कि उन्होंने ज्ञान प्राप्त कर लिया है और वे अब दुखों से मुक्त हैं. 


नोट: अभी इस गोलेन्द्रवादी ध्वज पर संशोधन का काम जारी है।

Monday, 17 March 2025

योगी और अखिलेश बहन जी से बहुत छोटे नेता हैं : गोलेन्द्र पटेल

 

योगी और अखिलेश बहन जी से बहुत छोटे नेता हैं

यूपी में
बीजेपी ने ‘इलाहाबाद’ का नाम बदलकर प्रयागराज किया
‘फैजाबाद’ का नाम बदलकर अयोध्या
‘मुग़लसराय’ स्टेशन का नाम बदलकर पं. दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन
गोरखपुर में ‘उर्दू बाजार’ को हिंदी बाजार,
‘हुमायूंपुर’ को हनुमान नगर,
‘मीना बाजार’ को माया बाजार
और ‘अलीनगर’ को आर्यनगर कर दिया
उन्होंने कई ‘उर्दू-फारसी’ वाले नाम बदलें
क्यों बदलें? क्या योगी मुसलमान विरोधी नहीं हैं?

लेकिन सपा ने ‘छत्रपति शाहूजी महाराज नगर’ का नाम बदलकर गौरीगंज किया
‘पंचशील नगर’ का नाम बदलकर हापुड़,
‘प्रबुद्ध नगर’ का नाम शामली
‘महामाया नगर’ का नाम हाथरस,
‘रमाबाई नगर’ का नाम कानपुर देहात,
‘ज्योतिबा फुले नगर’ का नाम अमरोहा,
‘भीमनगर’ का नाम बदलकर बहजोई
और ‘कांशीराम नगर’ का नाम कासगंज,
क्या सचमुच अखिलेश PDA के नेता हैं?

यदि ‘छत्रपति शाहूजी महाराज’ यादव कुल में जन्मे होते
तो वे नहीं बदलते
‘बुद्ध’ यादव कुल में जन्मे होते
तो वे नहीं बदलते
‘माता महामाया’ यादव कुल में जन्मी होतीं
तो वे नहीं बदलते
‘माता रमाबाई’ यादव कुल में जन्मी होतीं
तो वे नहीं बदलते
‘ज्योतिबा फुले’ यादव कुल में जन्मे होते
तो वे नहीं बदलते
‘अंबेडकर’ यादव कुल में जन्मे होते
तो वे नहीं बदलते
‘कांशीराम’ यादव कुल में जन्मे होते
तो वे नहीं बदलते
क्योंकि वे समाजवादियों से अधिक सामंतवादियों के नेता हैं
उन्हें ‘संविधान’ लहराने की वजह से नहीं जीताया गया है
बल्कि फिलहाल यूपी में OBC और अल्पसंख्यक के पास कोई विकल्प नहीं है
इसलिए जीताया गया
जिस दिन कोई विकल्प सामने आया,
उस दिन इनका पत्ता साफ़!

योगी और अखिलेश बहन जी की तुलना में बहुत छोटे नेता हैं
कोई मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने से बड़ा नेता नहीं होता है
बड़ा नेता तो वह होता है, जिसके पास बड़ा दिल हो।

© गोलेन्द्र पटेल

(नोट: इन तीनों नेताओं का आपसे में अच्छे संबंध हैं, इसलिए इनके समर्थकों को एक-दूसरे के समर्थकों से आपस में लड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि पार्टी या विचारधारा से बड़ी चीज़ है मनुष्यता। गुरु संत कबीरदास कहते हैं कि सत्य के लिए किसी से नहीं डरना चाहिए। यही बात ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ में  आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने भी लिखी है:
“सत्य के लिए किसी से नहीं डरना, गुरु से भी नहीं, लोक से भी नहीं, वेद से भी नहीं।”)


संपर्क: गोलेन्द्र पटेल (पूर्व शिक्षार्थी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।/जनपक्षधर्मी कवि-लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)

डाक पता - ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, तहसील-मुगलसराय, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।

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