Friday, 27 March 2020

आज बिमारी का जड़ दूषित जल है
जल है तो कल है ; जल ही जीवन है
एक पेड़ प्राण हैं ; पूज्य पर्वत वन हैं
जो देते हवा हैं ; वो निःशुल्क दवा है
वतन के तन का , भारत के मन का
प्यासी धरती  पुकार  रही चमन का
इंद्रदेव ले आओ जलधारा गगन का
एक कवि या पक्षी गीत गाता यही
जन वृक्ष काटों नहीं डाल छाटों नहीं।
-गोलेन्द्र पटेल
https://youtu.be/EbtIFgT8e1k
*"कोरोना" ने गाँव के दुकानदारों की कमाई बढ़ा दी...*
*अब "हंता" जो चूहों से फैल रहा है जनता को जन्नत दिखा रहा है। हे ईश्वर अल्लाह खुदा...! ये कब खत्म होगा?😢 😭*
आज एक रुपये की एक मर्चा
कैसे चलेगा मजदूरों की खर्चा

जो खुले गाँव में दूकान हैं अब
मूर्गा मुर्गी सुर्गी के भाव में सब
लेहसुन प्याज़ टमाटर..को रब
बेज रहे हैं, कोरोना आया जब

शहर से गाँव में "कर्ता" के साथ
घर वाले प्यार से मिलाया हाथ
सभी सदस्य हो गए रोगी नाथ

रात में खबर आई
भाई नया वाइरस "हंता"
जनता का हर रहा है प्राण

"कोरोना" का जनक चमगादड़
और मगरमच्छ हैं या कहूँ वुहान
जो भारत के घरों में नहीं रहता
पर "हंता" फैल रहा है चूहों से
जनता हो जाना सावधान....

छींक खाँसी सरदर्द जुकाम बुख़ार
साँस फूलना बदनदर्द और दो चार
यही सामान्य लक्षण कोरोना का

हंता के भी उपर्युक्त ही लक्षण
फेफड़ा-गुर्दा में वाइरसगण
धीरे धीरे छेद कर देते हैं
ब्लड प्रेशर बढ़ता झटका लगता
धडाम से गिरता एक मानव रोगी....
*-गोलेन्द्र पटेल*
*बीएचयू परिवार*

*#हांटावायरस : नाहक अकुलाहट और भय से बचिए।*

*चीन से कुछ ख़बरें एक दूसरे विषाणु हांटावायरस-संक्रमण की आ रही हैं। एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है और तीस से अधिक संक्रमण से ग्रस्त पाये गये हैं। सोशल मीडिया पर इस ख़बर से --- ज़ाहिर है , परेशान लोगों के अकुलाहट और बेचैनी बढ़नी ही थी।*

*हांटावायरस कोई एक विषाणु नहीं है , अनेक विषाणुओं का एक समूह है। चूहों को ये विषाणु संक्रमित करते हैं , पर उनमें रोग उत्पन्न नहीं करते। ऐसा विज्ञान का मानना है कि ये विषाणु चूहों की प्रजातियों के साथ ही लाखों सालों से विकसित होते रहे हैं : यह एक क़िस्म का कोइवॉल्यूशन है। एक ऐसा साहचर्य जिसमें दोनों एक-साथ बिना किसी को हानि पहुँचाए रहा करते हैं।*

*किन्तु इन संक्रमित चूहों के मल-मूत्र या लार से सम्पर्क में आने से मनुष्य में ये हांटावायरस पहुँच सकते हैं। शरीर के उनके भीतरी अंगों में इनके कारण दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं। फेफड़ों व गुर्दों को ये विषाणु अधिक प्रभावित करते हैं : हांटावायरस हेमरेजिक फ़ीवर विथ रीनल सिंड्रोम एवं हांटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम इन विषाणुओं के दो प्रमुख रोग-प्रारूप हैं। ये बीमारियाँ विरली हैं , किन्तु इनके कारण मरीज़ों की मृत्यु भी होती गयी है।*

*हांटावायरस-रोगों का संक्रमण एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में होना बहुत विरल है। ऐसा न के बराबर देखा गया है। ऐसे में इन विषाणुओं का संक्रमण तभी सम्भव है , जब कोई मनुष्य किसी संक्रमित चूहे के मल , मूत्र या लार को सूँघ कर फेफड़ों में प्रविष्ट करा ले। चूहों के काटने , संक्रमित चूहों के मल-मूत्र-लार से युक्त किसी वस्तु को छूने अथवा ऐसा संक्रमित भोजन खाने से भी इन विषाणु-रोगों का होना पाया गया है।*

*बुख़ार , बदनदर्द , खाँसी , साँस फूलना जैसे लक्षणों वाले इन रोगों के कारण मरीज़ों में ब्लड प्रेशर का गिरना , शॉक और गुर्दों का फ़ेल होना पाया जा सकता है। हांटावायरस हेमरेजिक बुख़ारों की मृत्यु दर तीस प्रतिशत से भी ऊपर पायी जा सकती है।*

*हांटावायरस-सम्बन्धित संक्रमणों की मनुष्य-से-मनुष्य में पहुँचने की आशंका न के बराबर है। इसलिए वर्तमान कठिन समय में चीन में पुष्ट हुए कुछ मामलों के आधार पर यहाँ जनता को घबराये बिना कोरोना-विषाणु-सम्बन्धित पैंडेमिक के लिए अपने रोकथाम के उपायों पर पूरा अमल करते रहना चाहिए......*
*बीएचयू ने बनाई निम्न फिल्म-*https://www.facebook.com/2494193190655065/posts/3624299540977752/?sfnsn=wiwspmo&extid=wjStZKDc3hJn5QNL&d=n&vh=e

*अफवाहों से बचें : बीएचयू परिवार Whatsapp 8429249326*

सांत्वना समय का सत्य है
भूख के जमीन पर भय है
भोजन मिले तो विजय है
भावी चुनाव में नेताजी!
भूखा नहीं किसी का
चाटूकार सूनो सरकार
समाजिक व्यक्ति दो चार
वह जीना चहता निर्भय
पेट के ध्वनि को शब्द दे।
एक कर्षित कटोरी ले
गाता जाता सहृदय से
सामर्थ्यवानों के सामने 
मानवता के तत्व पाने :
दया करुणा अनुकंपा।
आज कोविड19 का कहर है
झूठा वादा तंबाकू सा जहर है
हंता का जनक चूहा घर घर है
जनता कर्फ्यू से डरा हर नर हैं
भूखे मजदूरों के दर्द मेरे अंदर हैं...
-गोलेन्द्र पटेल

#क्या_नजारा_है_देखो : #मेरे_गाँव_की #मेरे_छत_से_देखो
उपर्युक्त कविता का पाठ भी करना चाहिए था : गोलेन्द्र पटेल

१.
मेरे छत से देखो उस छत के परी को
जो सरसों ओसा रही है इसी ओर वो
मेरी जीगर चोरनी बचपन में शोर तो
चारों ओर की कि तू काले से गोर हो
मुझसे मुहब्बत करना जीवन भर ओ
सूनो! इधर गर्दा आ रहा मन भर जो
कितना दर्द है यहाँ देखो मेरी परी रो
रही है और मैं मस्ती कर रहा हूँ सो
स्वप्न में अनेक अप्सराओं के संग अकेला
आँखें खुली जब पत्नी ने पानी पीठ पर रेला।।
-गोलेन्द्र पटेल

भोजपुरी अध्ययन केंद्र, बीएचयू और रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्थान,वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह तथा कविता पाठ का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस कार्यक्रम का पहला सत्र सम्मान समारोह का रहा जिसके मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथाकार और तद्भव पत्रिका के संपादक अखिलेश थे जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध हिन्दी कवि ज्ञानेन्द्रपति ने की।वरिष्ठ कवि सुभाष राय कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे।कार्यक्रम में नैनीताल के  युवा कवि संदीप तिवारी  को छठा रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार 2020 प्रदान किया गया जिसमें प्रशस्ति पत्र,अंगवस्त्रम के साथ सम्मानित राशि के रूप में पांच हज़ार की पुरस्कार राशि भी  प्रदान की गई।

भोजपुरी अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल ने अपने स्वागत वक्तव्य में सभी अतिथियों का स्वागत किया व कहा कि उत्सव  के इस बाजारू शोर में अंततः कविता ही है ,जो उल्लास की शांति को सुरक्षित करने का माध्यम है।आज के शोर में एक विशिष्ट स्वर को पहचानने की कोशिश है जिसमें हम जुड़ना चाहते हैं औरों को जोड़ना चाहते हैं। हमारे आसपास के शोर को कैसे सार्थक स्वर में बदला जाए यही एक कवि का मुख्य कर्म और धर्म है। बग़ैर सामाजिकता के कविकर्म सम्भव ही नहीं है ।कविता कैसे लिखी व पढ़ी जाए यह सहजात प्रतिभा के ऊपर ही निर्भर करता है।  आगे इन्होंने बताया कि नई पीढ़ी को वरिष्ठतम पीढ़ी के साथ मिलजुलकर अपना विकास करना चाहिए। नई पीढ़ी के प्रत्येक कवि की अपनी जमीन होती है वह अपने जमीन को पहचाने और आसमान से आंख मिलाए।शोर के समानांतर स्वर की विशिष्टता को पहचाना जाना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने वरिष्ठ पीढ़ी की तरफ से नई पीढ़ी को शुभाशीष प्रदान किया।

युवा आलोचक डॉ विंध्याचल यादव ने अपने वक्तव्य में कहा कि संदीप तिवारी की कविताओं में तीन तरह की विशेषताएं मिलती हैं। पहला सत्ता का सीधे प्रतिरोध करती कविताएं ,दूसरी किसान जीवन के दुख तकलीफों को व्यक्त करती कविताए,तीसरी विस्थापनबोध की कविताएं ।छोटी- छोटी यात्राओं की टीस को संदीप ने अपनी कविताओं में व्यक्त किया है। एक तरह से संदीप की कविताओं में यात्राओं का विशेष प्रसंग है।वे आगे कहते हैं कि हिंदी कविता में जो कवि कविताएं लिख रहे हैं घर से निकलते हुए उसकी टीस को व्यक्त किया है। पर साथ ही ये भी बताया कि घर से निकलना भी कितना जरूरी है इस बात पर भी विशेष जोर दिया है। नई पीढ़ी को इस विषय का ध्यान देना चाहिए कि विस्थापन बहुत बुरी चीज नहीं है। संदीप की कविताएं इस ओर अग्रसर हैं। इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि विस्थापन पर दुख नहीं व्यक्त करना  है। इसके साथ यह भी बताया कि यात्राओं और विस्थापन में अंतर होता है। संदीप की कविताओं में नागार्जुन और कैलाश गौतम की अनुगूंज मिलती है और अंत में संदीप की कविता बाल नरेंद्र का काव्यपाठ किया।

 मुख्य अतिथि सुभाष राय ने कहा कि इनकी कविताओं को दो तरह से देखा जा सकता है। गांव से विस्थापन की कविता । आगे कहा कि हम गांव तभी लौटे जब गांव वापस उसी समृद्धि को प्राप्त हो । कोई भी कवि एक खूबसूरत दुनिया के निर्माण की बात करता है ।कवि ने पैसेंजर के माध्यम से लोकतंत्र को पकड़ने की कोशिश की है।इन्होंने आगे कहा कि जहां पीड़ा है, दर्द है ,कवि वही रह सकता है इस प्रकार संदीप की कविता भी इसी रूप में दिखाई देती है।  हम सबका बोलना ही आज के समाज की जरूरत है ।

विशिष्ट वक्ता तद्भव पत्रिका के सम्पादक अखिलेश ने कहा कि कविताएं समाज के अवसाद और निराशा से बचने के लिए हमारी सहायता करती हैं क्योंकि इन कविताओं में यथार्थ का स्वीकार तो है पर साथ मे उससे जूझने की क्षमता भी है।आगे इन्होंने बताया कि कवि ने फैजाबाद और इलाहाबाद के नामों के परिवर्तन पर भी कविता लिखी है कवि का कहना है कि मैं इनका नाम यही मानूंगा यह कवि का हठ है।इसके माध्यम से कवि को चीजों के नष्ट हो जाने की व्यथा है। वे आगे कहते हैं कि कर्म की दुनिया में सदैव चलने वाली यात्रा यादों की यात्रा है। अपने गहरे परिवेश से बदल जाने की यात्रा है। संदीप तिवारी की कविता अपने परिवेश से जड़ों से गहरे होने की कविता है।इस कवि की बहुत सारी कविताएं लयात्मक हैं औरअन्य प्रयोग भी  है । इसके साथ ही युवा कवियों में दमन के स्वीकार की बात कही है।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ कवि ज्ञानेन्द्रपति ने कहा कि  संदीप की कविता से कवि का  बहुरंगीपन जाहिर होता है। ये बहुत आत्मीय कवि हैं। युवा कवि संदीप की कविताएं सम्वेदना सिद्ध कविताएं हैं।इनकी कविताओं में  पिछले कवियों का आत्मसातीकरण भी है इसके माध्यम से हम  अगले कवियों में पिछले कवियों की झलक देख सकते हैं। इन्होंने आगे कहा कि
नवीनता के योग से  सत्य को व्यक्त करने की कोशिश करनी चाहिए कई बार बड़ी बातों की होड़ में छोटी व महत्वपूर्ण बातों को दरकिनार कर दिया जाता है ।इसके साथ ही बताया कि कवि का  अतीत और जीवनानुभवो से युक्त यह दिया हुआ यथार्थ नहीं हो सकता,यह यथार्थ कमाया हुआ ,अर्जित किया हुआ तथा इन्द्रीयसम्वेदनाओं के सहारे  संवेदित करना यथार्थ है।किसी भी कवि की प्रतिध्वनि वेदना होती है। वेदना को यहाँ केवल पीड़ा से ही नहीं समझना चाहिए।

आत्मवक्तव्य देते हुए  सम्मानित कवि संदीप तिवारी ने कहा कि जिस ज़मीन ने मुझे आगे बढ़ाया है, उसका  एक कवि के रूप में मैं कर्ज उतार रहा हूँ। उन्होंने अपनी कविताओं को गहरी सामाजिक बेचैनी के बीच रची जाने वाली कविताओं के रूप में याद किया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रो रामकीर्ति शुक्ल ने इस क्रम में प्रशस्ति पत्र का वाचन भी किया।

कार्यक्रम के इस सत्र का संचालन शोध छात्र जगन्नाथ दुबे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन वंशीधर उपाध्याय ने दिया।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में काव्य पाठ का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता सुभाष राय ने की।

द्वितीय सत्र का प्रारंभ रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार 2020 से सम्मानित कवि संदीप तिवारी ने अपनी कविता  (विदाई का घर ,कितना कठिन है ,प्रायश्चित , पसिंजरनामा ,लोकतंत्र में कहाँ लोक है )कविताओं का पाठ किया।
इसके पश्चात आदित्य राज ने (मणिकर्णिका की ओर हिंदुस्तान…) 
प्रतिभा श्री(स्त्री और मर्द, मर्द, भूख, श्रमिक), आर्य भारत ने(अफीम का बेटा, बिल्किस बानो)
अनुपम सिंह ने ( औरत का अंग, जहरबाज, राष्ट्रीयसूतक), रविशंकर(डर, युवाछद्म),तौसीफ गोया ने मतला सुनाया ,
अरुणाभ सौरभ ने (रागयमन,मर्कतमाता, कथकहि),अमरजीत राम ने ( किसान और उनके बच्चे..), निलाम्बुज ने ( बनारस की गली में..), अदनान ने (याद का शहर..) ,डॉ रचना शर्मा ने (प्रेम में पतझड़, नेपथ्य सम्वाद),अंकिता  खत्री ने ( मैं पानी बन जाऊंगी, मैं गांव -गांव तुम शहर -शहर,आसान नहीं बनारस से प्यार करना),सोनी पांडेय ने ( मेरे पास सुंदर कुछ नहीं था, मूर्तियों का सच,कुछ अधूरी बातें, ये जो दिखाई दे रहा है), प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल ने (शिव), प्रो.बलराज पांडेय ने (अबकी बार जाड़ा कुछ ज्यादा पड़ा है, घड़ी, लड़की, सबसे बड़ा कलाकार) , वरिष्ठ कवि ज्ञानेन्द्रपति ने( शीघ्रदर्शनम,ट्राम में एक याद), प्रो चंद्रकला त्रिपाठी , कवि सुभाष राय , कुमार मंगलम, आर्यपुत्र दीपक तथा गोलेन्द्र पटेल इन सभी जनों ने काव्यपाठ किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्य पाठ का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता सुभाष राय ने की।

हे नदी!
प्यासी नदी
समुद्र की
पूज्य पुत्री
लक्ष्य
से लदी!

एक बूंद
उछाल
नीम के
ऊपर
सदी
के त्रासदी!

ध्वनि के
ध्वज तरंग
वात के
बात को
सुनकर

दुःखी
अनंत में
लहरफहर
हर शहर
हर नगर
हर डगर
धर कर
पदी पदी
चली नदी!

शून्य से
प्रसार में
द्वीप से
संसार में
झरे पत्तें
पेड़ के नीचे
नहीं

सड़क पर
जा लगा
रहे हैं नारे
जैसे टकरा
दूर्गंध-सुगंध
गीत गा
रहे हैं किनारे!

और अकेली
नदी नालों के
विरुद्ध आवाज़
देती कोयल को
जो रोज
संसद सदन के
आँगन में
कौओं के शब्दगान
के विरुद्ध राष्ट्रगान
के साथ गाती है
दर्द का दर्शन!

जिसमें प्रमुख
हैं गंङ्गा-यमुना
का दिव्यदृश्य
टट्टी-सी पानी
मुगलों की रानी
पहले हुई कानी
अब हो गई है
दृष्टिहीन

गाँधी का चश्मा
कब लगायेगी
दिल्ली
राजनीति के
रजाई पर
सोने से पहले
केवल एक बार
पूछ रही हैं
कर्षित नदियाँ!
रचना
-गोलेन्द्र पटेल





बेरोज़गारों का देश

बेरोज़गारों का देश बेरोज़गारी की पीड़ा ने नहीं बल्कि पाँव की प्रसन्नता ने फेफड़े से कहा  कि जब जनरल डब्बे में पैखाने के पास  हमें खड़ा होने ...