पिताश्री के बाबूजी को समर्पित कविता:-
जिनगी के सूरज : बाबूजी
1).
बाबूजी घर के आधार
परिवार के रखवार
उनके मेहनत से फूले
सुख-सम्पति संसार
बाबूजी धीरज के रूप
संकट में बिसवास
उनके छाँह में पलि-पुसि
मन में जागे आस।
अपना सपना छोड़ि के
लइकन के सपना सँवारें
अपना पसीना से बाबू
घर-अँगना उजियारें
नाता भर ना हउवें ऊ
नेह-धरम के धाम
उनके जीवन सिखावेला
मेहनत के पैगाम।
2).
अँगुरी पकड़ि के बाबू
चलल सिखवले राह
लड़खड़ाइत पाँव के
दिहले हिम्मत-थाह
लइकन के हर बात पर
उनकर मन हरसाला
अनुभव के उजियार से
जीवन-भेद बुझाला।
बोली चाहे कड़ा रहे
मनवा नेह से भींजल
बाहर से अनुशासन
भीतर प्रेम असीमल
गलती पर समझावेलें
सही राह देखावें
साँच-दया के सीख देके
जीवन-पथ सजावें।
3).
भोर भइल त काम पर
साँझे लवटें थाकल
फिरो लइकन के देख के
मन हो जाला चहकल
अपना दुख के पी जालें
मुख पर हँसी सजावें
परिवार के सुख खातिर
हर विपदा सहि जावें।
अभावन के बीच में
आस के दीप जरावें
सूखल मन के धरती पर
सपना के फूल खिलावें
मेहनत उनकर धरम ह
हिम्मत उनकर शान
आँधी-पानी में अडिग
राखें ऊ सम्मान।
4).
जे गोदी में खेलवलें
जे दिहलें दुलार
ओह बाबूजी के भुलाइल
केइसन होई व्यवहार
जवानी के जोश में
मत भुलइह बचपन
जिनका से सीखलऽ तू
जीवन के हर ज्ञान।
बुढ़ापा में बाबूजी
चाहें नेह-दुलार
दू मीठ बोल सुनि के
खिल जाला परिवार
धन-दौलत से बढ़ि के
सेवा के सम्मान
माई-बाबू के सुखे में
बसल बा भगवान।
5).
बाबूजी के छाती में
दुख के दरिया गहिर
फिरो लइकन खातिर
नेह बरसे दिन-रात
मन के पीर छिपा के
करम निभावत जालें
अपना दुख के बातियो
सबसे ना बतियालें।
लइकन के दुख देख के
उनकर मन घबराला
लइकन के हँसी देख के
चेहरा खिलि जाला
चुप्पी के भीतर छिपल
कितना नेह अपार
लइकन खातिर माँगेलें
सुख-संपति हर बार।
6).
जब बाबूजी चलि गइलें
सूना भइल दुआर
अँगना-अँगना गूँजे
याद के करुण पुकार
चौखट उनकर राह तके
अँगना खोजे पाँव
घर के कोना-कोना में
बसल रहे उनकर छाँव।
जे अँगुरी धरि के हमके
चलल सिखवले राह
ओही हाथ के बिनु अब
कइसे मिली निबाह
जानत मन कि अब ऊ
लवटि के ना अइहें
फिरो आँखि के कोर से
आँसू बहि-बहि जइहें।
7).
देह भले ना साथ हो
नेह कहाँ मरि पाला
उनकर सीख के दीपवा
मन में सदा जराला
उनकर मेहनत सिखवले
करम आ ईमान
उनकर जीवन बनि गइल
हमनी के पहचान।
उनकर बतिया याद करि
साँच के राह चलीं
दया, धरम आ प्रेम से
जीवन-बगिया फुलीं
बाबूजी नेह के सागर
करम-धरम के खान
उनके चरणन में बसल
हमरा मन के मान।
★★★
रचयिता: गोलेन्द्र पटेल (युवा कवि-लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)
संपर्क सूत्र (डाक पता): ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, तहसील-मुगलसराय, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत। पिन कोड : 221009 मोबाइल नं. : 8429249326 ईमेल : corojivi@gmail.com




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