“गोलेन्द्र ज्ञान” हिंदी का एक वैचारिक, साहित्यिक और सामाजिक मंच है, जहाँ बहुजन साहित्य, सामाजिक न्याय, मानवता, समता, शिक्षा, संस्कृति, कविता, आलोचना और जनचिंतन से जुड़े मौलिक लेख प्रकाशित किए जाते हैं। यह ब्लॉग भारतीय समाज, लोकसंस्कृति, बहुजन चिंतन, साहित्यिक विमर्श तथा मानवीय मूल्यों को सरल, शोधपरक और संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत करता है। यहाँ कविता, कहानी, निबंध, समीक्षा, दर्शन, इतिहास और समकालीन विचारों पर नियमित सामग्री उपलब्ध है।
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लोकतंत्र में हिंदी का लोक और लोक की हिंदी (भाषा, जनचेतना और सामाजिक न्याय की पड़ताल) — गोलेन्द्र पटेल
लोकतंत्र में हिंदी का लोक और लोक की हिंदी (भाषा, जनचेतना और सामाजिक न्याय की पड़ताल) 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंद...
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पहाड़ी कवि गोलेन्द्र पटेल की तीन कविताएँ:- 1). अरावली : पत्थरों की स्मृति, मनुष्यों की भूल नदी कहती है, मैं एक पहाड़ी कवयित्री हूँ इसीलिए...
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कवि रामेश्वर : जीवन, साहित्य और वैचारिक यात्राएँ जन्म और प्रारंभिक जीवन :- कवि रामेश्वर का जन्म १६ जुलाई १९४४ को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनप...
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"स्त्री / भूख / श्रमिक / पलायन / आत्महत्या / एक पन्ना / उत्तर आधुनिक कविताएँ / फर्क" : प्रतिभा श्री 【बीएचयू】 -© गोलेन्द्र पट...

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