Friday, 31 July 2026

जन्म का सिंहासन : गोलेन्द्र पटेल

जन्म का सिंहासन

मत पूछो मुझसे योग्यता की,
पहले जन्म की जंजीर तोड़ो।
सदियों से जो सिंहासन बाँटे,
उन विशेषाधिकारों को छोड़ो।

जिस घर में वंश ही प्रमाण है,
वहाँ कैसी प्रतिभा की माप?
जब उपनाम ही बन जाए सीढ़ी,
तो कैसा श्रम, कैसी प्रताप?

जन्म-जन्म का ताज पहनकर
मेहनत का उपदेश न देना।
अपने हिस्से सूरज रखकर
हमको केवल शेष न देना।

संसाधन पर पहरा रखकर,
फिर कहते, “सबको अवसर है।”
अपने आँगन फूल सजाकर,
बोलो, किसका यह समर है?

जब भी वंचित हाथ मिलाते,
सत्ता की नींद उचट जाती।
एकता की हर आहट सुनकर,
नफ़रत की दीवार उठाती।

भीड़ नहीं, बस शोर उछलता,
परदे वाली डिजिटल रण में।
सच की धूप से आँखें झुलसें,
छिप जाते हैं अपने घर में।

यदि सचमुच अन्याय अखरता,
तो पहले भेद मिटाना सीखो।
जाति-वंश के ऊँचे क़िलों को
मानवता से ढहाना सीखो।

संविधान की ज्योति जलाकर
बराबरी का पथ अपनाओ।
जन्म नहीं, बस कर्म बोलें,
ऐसा भारत फिर से बनाओ।

जिस दिन मानव, मानव होगा,
न कोई ऊँचा, न कोई नीचा।
उस दिन न्याय स्वयं मुस्काएगा,
इतिहास लिखेगा पृष्ठ नया।
★★★


रचनाकार: गोलेन्द्र पटेल (पूर्व शिक्षार्थी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।/बहुजन कवि, जनपक्षधर्मी लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)
डाक पता - ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, तहसील-मुगलसराय, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।
पिन कोड : 221009
व्हाट्सएप नं. : 8429249326
ईमेल : corojivi@gmail.com


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