Wednesday, 12 August 2026

जनपद चंदौली पर केंद्रित दो कविताएँ: गोलेन्द्र पटेल

चंदौली पर केंद्रित दो कविताएँ: गोलेन्द्र पटेल 
1).
चंदौलीगान

जय-जय चंदौली धरती, काशी का पूर्वी द्वार। 
धान-कटोरा भारत का, जन-जन का श्रृंगार॥
गंगा, कर्मनाशा बहतीं, चंद्रप्रभा मुस्काय। 
हरित वनों की गोद में, प्रकृति सुधा बरसाय॥
राजदरी-देवदरी की, झर-झर निर्मल धार। 
नौगढ़ पर्वत गूँज उठे, सुन वन का गुंजार॥
प्राचीन काशी की महिमा, तेरे कण-कण वास। 
इतिहासों की गाथाएँ, करतीं तेरा प्रकाश॥
बुद्ध-जैन-सनातन धारा, मिलकर गाएँ गीत। 
सह-अस्तित्व की संस्कृति से, जग में बनी पुनीत॥
रामगढ़ की पुण्य धरा पर, कीनाराम महान। 
लोकधर्म की ज्योति जली, बढ़ा मानव सम्मान॥
हेतमपुर का किला सुनाता, बीते युग की बात। 
अतीत और वर्तमान का, यहाँ अनोखा नात॥
माँ काली की शक्ति यहाँ है, लतीफ शाह की शान। 
मंदिर, मस्जिद, मठ, दरगाहें, बढ़ाएँ प्रेम विधान॥
खेत-खलिहान महकें प्रतिदिन, श्रम का हो सत्कार। 
अन्न उगाता किसान यहाँ का, धरती का आधार॥
लोकगीत की मधुर तान में, ऋतुओं का उत्सव। 
माटी से जुड़ा जीवन गाता, श्रम-सौंदर्य वैभव॥
वर्ष उन्नीस सौ सत्तानवे में, पाया जिला स्वरूप। 
विकास-पथ पर बढ़ता जाए, लेकर नव प्रतिरूप॥
ग्राम-ग्राम में जागे आशा, नगर करें विस्तार। 
शिक्षा, सेवा, श्रम और संस्कृति, हों जन-जन के द्वार॥
पूर्व में बिहार सुशोभित, पश्चिम काशी धाम। 
उत्तर गाज़ीपुर का सान्निध्य, दक्षिण सोनभद्र नाम॥
भारत की आत्मा का यह, अनुपम एक प्रतीक। 
जहाँ प्रकृति-संस्कृति संग-संग, रचतीं जीवन-लीक॥
जय-जय चंदौली धरती, गौरव गान अपार। 
धान-कटोरा भारत का, काशी का पूर्वी द्वार॥
जय चंदौली! जय चंदौली! जन-जन का अभिमान। 
श्रम-संस्कृति-इतिहास-प्रकृति, तेरी अमर पहचान॥
★★★

2).
चंद्रप्रभा के तट से चंदौली

विंध्य-कैमूर की गोद में, चट्टानों का संसार
नौगढ़-चकिया की घाटियाँ, हरित धरा शृंगार 
दक्षिणी अंचल वनमय, पथरीली हरियाली
निर्झर गाते शैल-शिखर, मनहर छवि मतवाली।

राजदरी-देवदरी झरें, चंद्रप्रभा के तीर
औरवाटांड़ गिरता नभ से, जलधारा गंभीर
कर्मनाशा-चंद्रप्रभा, जीवन के आधार
बाँध, सरोवर, गाँव मिल, रचते नव संसार।

धान-बान की हरितिमा, धरती का वरदान
जल-जंगल से साँस ले, चंदौली की जान
छठ-घाटों पर लोकमन, श्रद्धा से भरपूर
कजरी, बिरहा, सोहरें, संस्कृति के नूर।

दाल-भात, चटनी, अचार, सत्तू, बाटी-चोखा।
ठेकुआ, फरा, रसियाव, मिट्टी का स्वाद अनोखा॥
चौपालों की आत्मीयता, गमछा, खेत, किसान
श्रम-संस्कृति की सरलता, इसकी सच्ची शान।

सागौन-महुआ-तेंदुए, वन्य धरोहर साथ
हरियाली पर्यावरण की, जीवनमय सौगात
झरने, जंगल, धान और, लोक-हृदय की थाति
प्रकृति-संस्कृति संगम ही, चंदौली की जाति।
★★★
रचनाकार: गोलेन्द्र पटेल (
पूर्व शिक्षार्थी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।/जनकवि, जनपक्षधर्मी लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)

डाक पता - ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, तहसील-मुगलसराय, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।
पिन कोड : 221009
व्हाट्सएप नं. : 8429249326
ईमेल : corojivi@gmail.com


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कैमूर की गोद में बसा चंदौली, #चंद्रप्रभा के कल-कल झरनों, #राजदरी_देवदरी की मनोहारी जलधाराओं और #नौगढ़ के घने जंगलों से सजा प्रकृति का अनुपम उपहार है।

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#कैमूर_की_गोद_चंद्रप्रभा_की_धार — #चंदौली_बेमिसाल।

#प्रकृति_जहाँ_मुस्काए_वही_चंदौली_कहलाए।

#राजदरी_देवदरी_की_छटा — #चंदौली_की_पहचान।

#धान_के_खेतों_से_लोकगीतों_तक — #चंदौली_की_अपनी_बात।

#भोजपुरी_संस्कृति #किसान_की_शान — #चंदौली_की_पहचान।

#वन_जल_खेत_और_लोक — #चंदौली_का_अनुपम_संगम।

#माटी_की_महक #झरनों_की_तान — यही है अपना #चंदौली_महान।

#प्रकृति_का_वैभव #संस्कृति_की_मिठास — #चंदौली_पूर्वांचल_की_खास।


#बाटी_चोखा के पारंपरिक स्वाद, #भोजपुरी_लोकगीतों की मिठास, खेतों की हरितिमा और आत्मीय लोकजीवन से सजा यह जनपद #प्रकृति, #कृषि और #लोकसंस्कृति का जीवंत संगम है।


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#संक्षिप्त_परिचय:-

नाम : गोलेन्द्र पटेल (क्रांतिकारी जनकवि, जनपक्षधर्मी लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक : पूर्व शिक्षार्थी, हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी)

उपनाम/उपाधि : 'गोलेंद्र ज्ञान', 'गोलेन्द्र पेरियार', 'युवा किसान कवि', 'हिंदी कविता का गोल्डेनबॉय', 'काशी में हिंदी का हीरा', 'आँसू के आशुकवि', 'आर्द्रता की आँच के कवि', 'अग्निधर्मा कवि', 'निराशा में निराकरण के कवि', 'दूसरे धूमिल', 'काव्यानुप्रासाधिराज', 'रूपकराज', 'ऋषि कवि',  'कोरोजयी कवि', 'आलोचना के कवि', 'महास्थविर', 'अद्यतन कबीर', 'शब्द सुश्रुत' एवं 'दिव्यांगसेवी'।

जन्म : 5 अगस्त, 1999 ई.

जन्मभूमि : खजूरगाँव, साहुपुरी, चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।

शिक्षा : बी.ए. (हिंदी प्रतिष्ठा) व एम.ए., बी.एच.यू., हिन्दी से दो बार नेट पास। डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा से बीएड। संस्कृत विभाग बी.एच.यू. से दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से दो वर्षीय संस्कृत डिप्लोमा कोर्स।

भाषा : हिंदी व भोजपुरी।

विधा : कविता, नवगीत, कहानी, निबंध, नाटक, उपन्यास व आलोचना।

माता : श्रीमती उत्तम देवी

पिता : श्री नन्दलाल

पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन :

कविताएँ और आलेख -  'प्राची', 'बहुमत', 'आजकल', 'व्यंग्य कथा', 'साखी', 'वागर्थ', 'काव्य प्रहर', 'प्रेरणा अंशु', 'नव निकष', 'सद्भावना', 'जनसंदेश टाइम्स', 'विजय दर्पण टाइम्स', 'रणभेरी', 'पदचिह्न', 'अग्निधर्मा', 'नेशनल एक्सप्रेस', 'अमर उजाला', 'पुरवाई', 'सुवासित', 'गौरवशाली भारत' ,'सत्राची' ,'रेवान्त' ,'साहित्य बीकानेर', 'उदिता', 'विश्व गाथा', 'कविता-कानन उ.प्र.' , 'रचनावली', 'जन-आकांक्षा', 'समकालीन त्रिवेणी', 'पाखी', 'सबलोग', 'रचना उत्सव', 'आईडियासिटी', 'नव किरण', 'मानस',  'विश्वरंग संवाद', 'पूर्वांगन', 'हिंदी कौस्तुभ', 'गाथांतर', 'कथाक्रम', 'कथारंग', 'देशज', 'पक्षधर', 'परिकथा', 'ककसाड़', 'समय की साखी', 'आर्यकल्प', 'ज्ञानगृह', 'अंग भारत', 'विश्व केसरी', 'जनमोर्चा', 'करेंट एजेंडा', 'आदिवासीधारा', 'अर्जक संघ', 'मुस्कान एक एहसास', 'एक और अंतरीप' आदि प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रमुखता से प्रकाशित एवं दर्जन भर से ऊपर संपादित पुस्तकों में रचनाएँ प्रकाशित हैं। पुस्तकें शीघ्र प्रकाशित होंगी।

प्रकाशनाधिन पुस्तक : 'तुम्हारी संतानें सुखी रहें सदैव' (लम्बी कविताएँ), 'दुःख दर्शन' (लम्बी कविताएँ), 'कल्कि'( बहुजन खंडकाव्य), 'अंबेडकरगाथापद' (महाकाव्य), 'नारी' (लघु महाकाव्य), 'बहुजन महापुरुष और महापुरखिन', 'मेरा दुःख मेरा दीपक है' (कविता संग्रह)

काव्यपाठ : अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय काव्यगोष्ठियों में कविता पाठ।

सम्मान : अंतरराष्ट्रीय काशी घाटवॉक विश्वविद्यालय की ओर से "प्रथम सुब्रह्मण्यम भारती युवा कविता सम्मान - 2021" , "रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार-2022", हिंदी विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय की ओर से "शंकर दयाल सिंह प्रतिभा सम्मान-2023",  "मानस काव्य श्री सम्मान 2023", "शब्द शिल्पी सम्मान 2025", "महावीरप्रसाद ‘विद्यार्थी’ स्मृति शब्द संधान सम्मान 2025", "साहित्य का सार्थवाह सम्मान 2025" एवं अनेकानेक साहित्यिक संस्थाओं से प्रेरणा प्रशस्तिपत्र प्राप्त हुए हैं।

संप्रति : मानद महास्थविर, बौद्ध महाविहार खजूरगाँव

संस्थापक : १). ग्राम ज्ञान संस्थान, २). दिव्यांग सेवा संस्थान गोलेन्द्र ज्ञान एवं ३). छत्रपति शाहूजी महाराज सत्यशोधक संस्थान

संपर्क :

डाक पता - ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, तहसील-मुगलसराय, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।

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व्हाट्सएप नं. : 8429249326

ईमेल : corojivi@gmail.com



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